वंदे मातरम् पर सियासत ठीक नहीं: मायावती ने कहा- सरकारें बेरोजगारी, शिक्षा और बाढ़ जैसे मुद्दों पर दें ध्यान

BSP In UP
लखनऊ : राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के गायन को लेकर देश में जारी राजनीतिक घमासान के बीच बसपा सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री Mayawati ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर वंदे मातरम् को लेकर हो रही राजनीति को उचित नहीं बताया। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ सभी राजनीतिक दलों से बेरोजगारी, शिक्षा, युवाओं और बाढ़ जैसी गंभीर समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की है।

वंदे मातरम् के पूरे गीत के गायन और केवल शुरुआती दो छंद गाए जाने को लेकर देश में इन दिनों राजनीतिक विवाद तेज है। केंद्र सरकार द्वारा वंदे मातरम् के गायन से संबंधित कानून बनाए जाने के बाद यह मुद्दा और चर्चा में आ गया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले पर पूरे वंदे मातरम् का गायन किया गया। इसके बाद दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रगीत के गायन को लेकर हुए घटनाक्रम ने राजनीतिक विवाद को हवा दे दी।

कांग्रेस मुख्यालय के बाद बढ़ा विवाद

कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् के शुरुआती दो छंद पूरे होने के बाद आगे के छंद गाए जाने लगे। इस दौरान सोनिया गांधी की प्रतिक्रिया से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। इसके बाद भाजपा ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए इसे राष्ट्रगीत के अपमान से जोड़ा।भाजपा लगातार कांग्रेस के उस रुख पर सवाल उठा रही है, जिसमें पार्टी ने 1937 के कांग्रेस कार्य समिति के निर्णय का हवाला देते हुए केवल शुरुआती दो छंद गाने की बात कही है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि वंदे मातरम् और राष्ट्रगान को लेकर उसका रुख पूरी तरह स्पष्ट है और भाजपा इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से पेश कर रही है। भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी इस राजनीतिक टकराव के बीच अब मायावती की प्रतिक्रिया ने बहस को नई दिशा दे दी है।

मायावती बोलीं- इस मुद्दे पर राजनीति करना ठीक नहीं

बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक्स पर अपनी बात रखते हुए कहा कि देश में इस समय वंदे मातरम् को पूरा गाने, केवल शुरुआती दो छंद गाने या नहीं गाने को लेकर राजनीति चल रही है, जो ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि हाल ही में संसद में वंदे मातरम् के संबंध में कानून पारित किया गया है, लेकिन सत्ता परिवर्तन के दौरान राजनीतिक दल अपने राजनीतिक हितों के अनुसार नीतियों और कानूनों में बदलाव करते रहे हैं।मायावती के अनुसार, कई बार राजनीतिक दल अपनी कमियों से जनता का ध्यान हटाने के लिए ऐसे मुद्दों को प्रमुखता देते हैं। उन्होंने कहा कि देशहित के महत्वपूर्ण सवालों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

बेरोजगारी और बाढ़ को बताया बड़ा मुद्दा

बसपा प्रमुख ने कहा कि वर्तमान समय में देश के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। बेरोजगार युवाओं, छात्र-छात्राओं और नई पीढ़ी के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकारों को विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने ‘जेन-जी’ और ‘जेन-अल्फा’ का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं और बच्चों की शिक्षा, रोजगार और भविष्य को प्राथमिकता देना समय की जरूरत है। इसके साथ ही देश के कुछ हिस्सों में आई भीषण बाढ़ से हो रही जान-माल की हानि पर भी उन्होंने चिंता जताई। मायावती ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ सभी राजनीतिक दलों को जनहित से जुड़े मुद्दों पर समुचित ध्यान देना चाहिए। उनके अनुसार, यही वर्तमान समय में देश और जनता की सबसे बड़ी जरूरत है।

भाजपा-कांग्रेस के बीच अलग रुख

वंदे मातरम् के मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस जहां एक-दूसरे पर हमलावर हैं, वहीं मायावती ने दोनों से अलग रुख अपनाते हुए राजनीतिक दलों को आम जनता से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देने की नसीहत दी है। बसपा सुप्रीमो के बयान के बाद वंदे मातरम् को लेकर जारी राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा किस दिशा में जाता है। हालांकि मायावती ने साफ कर दिया है कि मौजूदा समय में राजनीतिक विवादों से अधिक जरूरी बेरोजगारी, शिक्षा, युवाओं के भविष्य और आपदा प्रभावित लोगों की समस्याओं का समाधान है।

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