सहारनपुर में 17.29 करोड़ की जाली करेंसी की जांच तेज, NIA के दो वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे करेंसी चेस्ट

Fake Notes in PNB's Currency Chest

सहारनपुर : पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट में करोड़ों रुपये की जाली और संदिग्ध करेंसी मिलने के मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने भी मामले की पड़ताल तेज कर दी है। शनिवार को देहरादून से NIA के CO रैंक के दो वरिष्ठ अधिकारी सहारनपुर पहुंचे और करेंसी चेस्ट से जुड़े रिकॉर्ड तथा अब तक की जांच में सामने आए तथ्यों की जानकारी ली।

जांच एजेंसी का फोकस करेंसी के पूरे मूवमेंट को समझने पर है। इसमें बैंक में नकदी आने से लेकर उसकी गिनती, बंडलिंग, पैकिंग, सीलिंग और दूसरी करेंसी चेस्ट के जरिए RBI को भेजे जाने तक की प्रक्रिया शामिल है। सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान बैंक अधिकारियों को प्रक्रिया से अलग रखा गया और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की गई।

जांच में छह जुलाई को सहारनपुर करेंसी चेस्ट से SBI करेंसी चेस्ट के जरिए RBI जयपुर भेजी गई करीब 111 करोड़ रुपये की करेंसी भी अहम मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि इस खेप में 500 रुपये के करीब 1900 बंडल और 200 रुपये के करीब 800 बंडल शामिल थे। RBI जयपुर में जांच के दौरान बड़ी संख्या में जीर्ण-शीर्ण और संदिग्ध नोट मिलने के बाद सहारनपुर करेंसी चेस्ट की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई।

अब NIA यह पता लगाने में जुटी है कि इस रकम की गिनती और बंडल तैयार करने में कौन-कौन कर्मचारी और अधिकारी शामिल थे। खासतौर पर यह जांच की जा रही है कि संदिग्ध नोट बैंकिंग सिस्टम में किस स्तर पर पहुंचे और करेंसी से जुड़े संवेदनशील काम की जिम्मेदारी किन लोगों के पास थी।

मामले में पार्ट टाइम हाउसकीपर विशाल कुमार की भूमिका भी जांच के दायरे में है। बताया गया है कि उसे गंदे और जीर्ण-शीर्ण नोटों की गिनती तथा बंडल तैयार करने का काम दिया गया था। एजेंसी यह पता कर रही है कि उसे यह जिम्मेदारी किसके आदेश पर मिली और उसके पास कितनी रकम रही।

एसपी सिटी व्योम बिंदल के मुताबिक, शुरुआती जांच में करीब 7.40 करोड़ रुपये की जाली करेंसी सामने आई थी। आगे सत्यापन के बाद यह आंकड़ा बढ़कर करीब 17.29 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसके अलावा मुख्यालय भेजी गई नकदी के मिलान में करीब 4.36 लाख रुपये की कमी भी सामने आई थी।

करेंसी चेस्ट से जुड़े तीन बैंक प्रबंधकों—रवि कुमार कांसे, सुशील शर्मा और अमित कुमार—को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। वहीं विशाल कुमार को भी काम से हटा दिया गया था। पुलिस की SIT और RBI-PNB की संयुक्त टीम पहले से मामले की जांच कर रही है। अब NIA के शामिल होने से जांच और व्यापक हो गई है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों रुपये की संदिग्ध करेंसी बैंकिंग सिस्टम में दाखिल होकर करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंची और RBI जयपुर भेजी गई 111 करोड़ रुपये की खेप में मिले संदिग्ध नोटों का इस पूरे मामले से क्या संबंध है। जांच एजेंसियां इन्हीं सवालों के जवाब तलाश रही हैं।

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