2 लाख का इनामी बदमाश भानु प्रताप सिंह STF मुठभेड़ में ढेर, 40 से ज्यादा मुकदमों का था आरोपी

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गोरखपुर/अयोध्या : उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने रविवार देर रात एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 2 लाख रुपये के इनामी बदमाश भानु प्रताप सिंह उर्फ बबलू को मुठभेड़ में मार गिराया। भानु प्रताप पर हत्या, रंगदारी और अन्य गंभीर अपराधों समेत करीब 40 मुकदमे दर्ज थे। वह लंबे समय से पुलिस की गिरफ्त से बाहर चल रहा था और कई जिलों की पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी।

पुलिस के अनुसार, रविवार रात एसटीएफ को सूचना मिली कि गोरखपुर के बेलघाट थाना क्षेत्र के विधानापार निवासी भानु प्रताप सिंह अपने एक साथी के साथ बाइक से अयोध्या के महाराजगंज थाना क्षेत्र से गुजरने वाला है। सूचना के आधार पर एसटीएफ ने एमी घाट के पास घेराबंदी की।

जब पुलिस टीम ने उसे रोकने का प्रयास किया तो उसने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में एसटीएफ की गोली भानु को लगी और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंची, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

कई जिलों में घोषित था इनाम

भानु प्रताप सिंह पर विभिन्न जिलों की पुलिस ने कुल 2 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।

  • गोरखपुर पुलिस – ₹25,000
  • आजमगढ़ पुलिस – ₹1,00,000
  • अंबेडकरनगर पुलिस – ₹50,000
  • बस्ती पुलिस – ₹15,000

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक वह वर्ष 2023 से लगातार फरार चल रहा था।

कैसे बना अपराध की दुनिया का बड़ा नाम?

भानु प्रताप सिंह की अपराधी बनने की कहानी अन्य अपराधियों से कुछ अलग बताई जाती है। बेलघाट थाना क्षेत्र के बहादुरपुर गांव में रहने वाले होमगार्ड कमांडेंट विनोद सिंह और भानु के मित्र मोनू के परिवार के बीच पुरानी रंजिश थी। इसी विवाद के चलते भानु प्रताप ने कथित तौर पर होमगार्ड कमांडेंट विनोद सिंह की हत्या कर दी।

इस घटना के बाद उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा और धीरे-धीरे बेलघाट क्षेत्र का हिस्ट्रीशीटर बन गया। विनोद सिंह हत्याकांड के बाद ही उसके खिलाफ गोरखपुर में एक के बाद एक कई मुकदमे दर्ज हुए।

2023 में पहली बार घोषित हुआ था इनाम

भानु प्रताप सिंह, मानसिंह का दूसरा पुत्र था और मूल रूप से विधानापार गांव का निवासी था। गोरखपुर पुलिस ने उसके खिलाफ 19 सितंबर 2023 को पहली बार इनाम घोषित किया था। इसके बाद वर्ष 2025 में आजमगढ़ के मुबारकपुर थाना क्षेत्र में दूध व्यापारी पातीराम की हत्या के मामले में उसका नाम सामने आया। इस घटना के बाद वाराणसी जोन के एडीजी ने उस पर 1 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।

गांव में पसरा सन्नाटा

स्थानीय लोगों के अनुसार, भानु प्रताप सिंह पिछले लगभग 10 वर्षों से अपने गांव नहीं आया था। एनकाउंटर की खबर के बाद विधानापार गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। उसके घर के बाहर खामोशी है और ग्रामीण इस मामले पर खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।

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