सड़कों पर नमाज को लेकर सीएम योगी के बयान पर छिडी बहस, उलेमाओं ने जताई आपत्ति

CM Yogi's statement on offering prayers on the streets sparks debate

सहारनपुर : उत्तर प्रदेश में सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। सीएम योगी आदित्य नाथ के हालिया बयान के बाद राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त लहजे में कहा कि सड़कों पर नमाज किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि लोग प्यार से मान जाएं तो ठीक है, अन्यथा दूसरा तरीका भी अपनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद इस्लामिक जगत में हलचल बढ़ गई है और कई उलेमाओं ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। देवबंद के कई इस्लामिक धर्मगुरुओं ने मुख्यमंत्री के बयान पर एतराज जताते हुए कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को शब्दों का चयन बेहद संतुलित और जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि सड़कों पर नमाज पढ़ना उचित नहीं है और मुसलमानों को मस्जिदों के भीतर ही नमाज अदा करनी चाहिए।

इस्लामिक धर्मगुरु मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि वह इस बात से सहमत हैं कि नमाज सड़कों पर नहीं पढ़नी चाहिए। उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील करते हुए कहा कि सभी लोग मस्जिदों में और जरूरत पड़ने पर अलग-अलग शिफ्टों में नमाज अदा करें। मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी का बयान मुसलमानों के लिए एक संदेश है कि कानून व्यवस्था के मामलों को गंभीरता से लिया जाए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था। मुख्यमंत्री ने धर्मनिरपेक्षता और सभी धर्मों का सम्मान करने की शपथ ली है। इसलिए उनके बयान में संयम और संतुलन होना चाहिए था।
वहीं देवबंदी उलेमा मुफ्ती अरशद कासमी ने भी मुख्यमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईद, बकरीद और जुमे की नमाज पहले से ही अधिकतर मस्जिदों में अलग-अलग समय और शिफ्टों में पढ़ी जाती है। उन्होंने कहा कि इस्लाम में व्यवस्था और अनुशासन का विशेष महत्व है तथा अधिकांश मुसलमान कानून का पालन करते हुए नमाज अदा करते हैं। मुफ्ती अरशद कासमी ने कहा कि मुख्यमंत्री देश के सबसे बड़े राज्य के प्रमुख हैं, इसलिए उनके बयान सौहार्द और भाईचारे को बढ़ाने वाले होने चाहिए।
उन्होंने कहा कि धार्मिक मामलों में संवाद और समझदारी की जरूरत होती है, न कि टकराव की भाषा की। उलेमाओं ने यह भी स्पष्ट किया कि समाज में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री योगी के बयान के बाद यह मुद्दा अब राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर सरकार सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक गतिविधियों को नियंत्रित करने की बात कर रही है।
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