सहारनपुर : बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी द्वारा जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में स्थित एक अवैध मस्जिद के विरुद्ध की गई शिकायत पर प्रशासन ने अत्यंत कठोर और ऐतिहासिक कदम उठाया है। विकास त्यागी ने अपनी शिकायत में प्रमुखता से उजागर किया था कि अति संवेदनशील और गोपनीय कार्यों वाले जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में अवैध रूप से मस्जिद का निर्माण किया गया है। इतना ही नहीं, इस परिसर का उपयोग केवल धार्मिक गतिविधियों के लिए नहीं, बल्कि व्यावसायिक लाभ के लिए भी किया जा रहा है। जहाँ एक डाकघर संचालित होने के साथ-साथ कई कमरों को बाहरी लोगों को किराए पर दिया गया था और इनका मासिक किराया अवैध रूप से मस्जिद कमेटी द्वारा वसूला जा रहा था।
इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए नगर मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अवैध मस्जिद को तत्काल प्रभाव से ध्वस्त करने के आदेश जारी किए हैं। प्रशासन की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई से अवैध कब्जेधारियों में हड़कंप मच गया है। न्यायालय ने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने और उसका दुरुपयोग करने के आरोप में कब्जाधारी पर लगभग छः करोड़ इक्तालीस लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना भी आरोपित किया है। विकास त्यागी द्वारा उठाई गई इस शिकायत के बाद ही प्रशासन हरकत में आया था और सरकारी कार्यालय की सुरक्षा व गोपनीयता से खिलवाड़ करने वालों पर यह निर्णायक कार्रवाई सुनिश्चित की गई है।
शासकीय अधिवक्ता विनय चौहान ने बताया कि नगर मजिस्ट्रेट कोर्ट ने करीब डेढ़ साल की सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया है। दोनों पक्षों से साक्ष्य और सबूत मांगे गए तो मस्जिद पक्ष के वकील परवेज जब्बार केवल बिजली बिल और नगर पालिका के असिस्मेंट ही पेश कर पाए। उनके पास न तो कोई रजिस्ट्री के कागज़ मिले और ना ही मालिकाना हक़ के सबूत। मजिस्ट्रेटी जांच में कलेक्ट्रेट परिसर में 315 वर्ग मीटर में बनाई गई मस्जिद पूरी तरह अवैध पाई गई। जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर जिला मुख्यालय परिसर में अवैध रूप से बनाई गई मस्जिद पर ध्वस्तीकरण का नोटिस चस्पा किया गया।
बजरंग दल पदाधिकारी विकास त्यागी ने बताया कि कलेक्ट्रेट में यह मस्जिद 1951 से चली आ रही है। तथाकथित मुत्तविल मस्जिद में बने कमरों को किराए पर देकर वसूली कर रहे थे। चुनावी सीजन में जिस वक्त कलेक्ट्रेट परिसर को सील कर चुनावी प्रक्रिया चलती थी उस दौरान मस्जिद में नमाज पढ़ने के बहाने सैकड़ों बाहरी लोग अंदर घुसते थे। जिससे जिला प्रशासन और चुनाव आयोग की गोपनीयता भंग होने का संदेह बना रहता है। उन्होंने प्रशासन से मस्जिद को जल्द ध्वस्त करने के साथ जुर्माने की राशि दोगुनी करने की मांग की है।

