जौहर यूनिवर्सिटी पहुंचे सांसद मोहिबुल्लाह नदवी, नहीं खुला गेट; बोले—कानूनी प्रक्रिया के कारण नहीं मिली अनुमति

जौहर यूनिवर्सिटी पहुंचे सांसद मोहिबुल्लाह नदवी, नहीं खुला गेट; बोले—कानूनी प्रक्रिया के कारण नहीं मिली अनुमति

रामपुर : समाजवादी पार्टी के सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी शनिवार को पूर्व कैबिनेट मंत्री और सपा के वरिष्ठ नेता आज़म खान के ड्रीम प्रोजेक्ट मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के समर्थन में रामपुर पहुंचे। हालांकि उनकी यह यात्रा उस समय चर्चा का विषय बन गई, जब यूनिवर्सिटी का मुख्य द्वार उनके काफिले के लिए नहीं खोला गया और उन्हें काफी देर तक बाहर इंतजार करना पड़ा।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सांसद समर्थकों और पार्टी नेताओं के साथ यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट तक पहुंचे थे। काफिला कुछ समय तक गेट के बाहर खड़ा रहा और सांसद अपनी कार में बैठे इंतजार करते रहे। बाद में वह कार से बाहर निकले और मीडिया से बातचीत की।

मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी ने किसी भी तरह के विवाद या नाराजगी की बात से इनकार किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ मामले वर्तमान में कानूनी प्रक्रिया के अधीन हैं और परिस्थितियां संवेदनशील हैं। इसी कारण यूनिवर्सिटी प्रशासन ने एहतियात बरतते हुए उन्हें अंदर आने की अनुमति नहीं दी। सांसद ने कहा, “इसका किसी व्यक्ति विशेष की नाराजगी या मतभेद से कोई संबंध नहीं है। प्रशासन ने जो निर्णय लिया, वह मौजूदा कानूनी परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है।”

उन्होंने जौहर यूनिवर्सिटी को केवल आज़म खान की परियोजना बताने के बजाय इसे पूरे समाज की साझा धरोहर बताया। अपने साथ मौजूद विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों का परिचय कराते हुए उन्होंने कहा कि हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी समाज के लोग यूनिवर्सिटी के समर्थन में एकजुट हैं। उनका कहना था कि इस संस्थान से हजारों छात्र-छात्राओं का भविष्य जुड़ा हुआ है और सभी चाहते हैं कि यहां शिक्षा का माहौल बिना किसी व्यवधान के बना रहे।

पत्रकारों ने जब उनसे पूछा कि क्या आज़म खान उनसे नाराज हैं, इसलिए गेट नहीं खोला गया, तो सांसद ने इस संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि वह पहले भी जंतर-मंतर पर जौहर यूनिवर्सिटी का मुद्दा उठा चुके हैं और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में पूरी पार्टी यूनिवर्सिटी के साथ खड़ी है।

एक अन्य सवाल पर कि वह आज़म खान की मोहब्बत में आए हैं या यूनिवर्सिटी की मोहब्बत में, मौलाना मोहिबुल्लाह ने कहा कि “आज़म खान और जौहर यूनिवर्सिटी को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता, लेकिन यह यूनिवर्सिटी पूरे हिंदुस्तानी समाज की साझा विरासत है।”

सांसद के दौरे और गेट नहीं खुलने की घटना ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। हालांकि उनके बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया कि वह इस पूरे घटनाक्रम को प्रशासनिक और कानूनी एहतियात का परिणाम मानते हैं, न कि किसी राजनीतिक या व्यक्तिगत मतभेद का। फिलहाल जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामलों पर सभी की निगाहें बनी हुई हैं।

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