अवैध मस्जिद पर नोटिस चिपकाने से सियासत गरमाई, कांग्रेस MP इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए

Congress MP Imran Masood, Notice pasted on mosque, Illegal mosque in UP, Illegal mosque, Notice pasted on Saharanpur mosque,

सहारनपुर : सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में एक कथित अवैध मस्जिद को गिराने का नोटिस चिपकाए जाने के बाद मामला राजनीतिक मोड़ ले रहा है। कांग्रेस MP इमरान मसूद ने इस कार्रवाई को लेकर BJP सरकार और जिला प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने नोटिस को न्यायिक प्रक्रिया के बजाय प्रशासनिक कार्रवाई बताया और इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने यह भी कहा कि मस्जिद पक्ष इस मामले को कोर्ट में चुनौती देगा।

इमरान मसूद ने कहा कि पहली नजर में यह आदेश कोर्ट के आदेश से ज्यादा प्रशासनिक आदेश लगता है। उन्होंने कहा कि अगर किसी निर्माण को अवैध घोषित किया जा रहा है, तो प्रशासन को पहले उस जमीन का मालिकाना हक साफ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस जमीन को प्रशासन मस्जिद की जमीन बता रहा है, उसी परिसर में एक मंदिर भी है। इसलिए सिर्फ मस्जिद को निशाना बनाना कई सवाल खड़े करता है।

कांग्रेस MP ने दावा किया कि जिस मस्जिद की बात हो रही है, वह बहुत पुरानी है और उस समय बनी थी जब मौजूदा कलेक्ट्रेट बिल्डिंग भी नहीं थी। उन्होंने कहा कि मस्जिद की तरफ़ से 1911 का बिजली का बिल है, जो इसके लंबे समय से होने का सबूत है। उन्होंने आगे कहा कि भारत सरकार के पोस्टल डिपार्टमेंट ने भी जगह को मान्यता दी है और वहाँ किराए पर एक पोस्ट ऑफ़िस चलाया है। उनके मुताबिक, अगर किसी सरकारी डिपार्टमेंट ने सालों से जगह का इस्तेमाल किया है, तो यह एक ज़रूरी बात है जिस पर एडमिनिस्ट्रेशन को ध्यान देना चाहिए।

इमरान मसूद ने कहा कि सरकारी ज़मीन पर मस्जिद नहीं बनाई जा सकती, लेकिन अगर एडमिनिस्ट्रेशन यह दावा कर रहा है कि ज़मीन सरकारी है, तो उसे पहले यह साबित करना होगा कि असल में उस ज़मीन का मालिकाना हक़ सरकार के पास है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस ज़मीन पर अभी कलेक्ट्रेट है, उसका मालिकाना हक़ भी साफ़ नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार खुद ज़मीन के मालिकाना हक़ के बारे में साफ़ नहीं है, तो सिर्फ़ एक पार्टी के ख़िलाफ़ कार्रवाई करना सही नहीं ठहराया जा सकता।

उन्होंने एडमिनिस्ट्रेशन पर भेदभाव वाला रवैया अपनाने का भी आरोप लगाया। इमरान मसूद ने कहा कि यह पूरी कार्रवाई सिर्फ़ एक खास समुदाय को खुश करने के लिए की जा रही है। उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए बराबर होना चाहिए, और कोई भी कार्रवाई निष्पक्ष और ट्रांसपेरेंट होनी चाहिए।

कांग्रेस MP ने नोटिस की टाइमिंग पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सावन के महीने में कांवड़ यात्रा चल रही है और पूरा शहर भगवान शिव की भक्ति में डूबा हुआ है। बड़ी संख्या में शिव भक्त लगातार यात्रा कर रहे हैं। ऐसे नाजुक समय में इस तरह का नोटिस जारी करना और विवाद खड़ा करना किसी भी तरह से सही नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को ऐसे मामलों में कानून-व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव को प्राथमिकता देनी चाहिए।

इमरान मसूद ने कहा कि मस्जिद पक्ष पूरे मामले को कोर्ट में ले जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन को कोर्ट में अपने दावों के समर्थन में ठोस दस्तावेज पेश करने चाहिए और अगर जमीन का मालिकाना हक साफ नहीं हुआ तो प्रशासन का केस कमजोर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति या संगठन को बेदखल करने से पहले सरकार को यह पक्का कर लेना चाहिए कि उन्होंने उस प्रॉपर्टी पर कानूनी अधिकार स्थापित कर लिए हैं।

फिलहाल, कलेक्ट्रेट परिसर में लगे नोटिस ने राजनीतिक हलकों में गरमागरम बहस छेड़ दी है। प्रशासन जहां इस कार्रवाई को नियमों के मुताबिक बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे पक्षपाती और जल्दबाजी में उठाया गया कदम बता रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि मस्जिद पक्ष कब कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा और इस विवाद पर कोर्ट का अगला रुख क्या होगा।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया News 14 Today के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...

Related posts