सहारनपुर : सहारनपुर में मंगलवार को राजनीतिक माहौल उस समय गरमा गया जब कैराना से समाजवादी पार्टी की MP इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच कहासुनी हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि पुलिस MP को महिला थाने ले गई, जहां उन्हें करीब 10 मिनट तक रखा गया। बात और बिगड़ गई और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए। मामला बढ़ता देख पुलिस अधिकारियों को बीच-बचाव कर हालात को काबू में करना पड़ा। MP इकरा हसन ने न सिर्फ DIG और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, बल्कि DIG ऑफिस से उन्हें बाहर निकालने का भी आरोप लगाया है।
बता दें कि कैराना की MP इकरा हसन जसाला गांव के मोनू कश्यप मर्डर केस में पीड़ित परिवार को इंसाफ दिलाने के लिए DIG ऑफिस गई थीं। वहां मोनू कश्यप की मां और समाजवादी पार्टी के कई नेता भी मौजूद थे। MP का आरोप है कि DIG ने पीड़ित परिवार की बात सुनने के बजाय उन्हें जाने के लिए कहा।
इकरा हसन ने कहा कि वह पीड़ित परिवार के साथ इंसाफ मांगने गई थीं। लेकिन पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन ने उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें दबाने की कोशिश की। MP के मुताबिक, जब वह DIG के ऑफिस के बाहर खड़ी होकर पीड़ित परिवार के साथ आगे की स्ट्रैटेजी पर बात कर रही थीं, तो पुलिस अधिकारियों ने उन्हें जाने के लिए कहा।
महिला पुलिस अधिकारी और MP के बीच बहस हो गई। तस्वीरों में, महिला इंस्पेक्टर MP को जाने के लिए कहती दिख रही हैं। जिस पर इकरा हसन जवाब देती हैं, “मुझे मत छुओ।” महिला पुलिस अधिकारी जवाब देती हैं कि उन्होंने उन्हें छुआ नहीं, बल्कि सिर्फ रास्ता दिखाया था। दोनों के बीच कुछ देर तक तीखी बहस होती है। मामला तब और बढ़ गया जब पुलिस MP को महिला पुलिस स्टेशन ले गई। वहां पुलिस अधिकारियों ने उन्हें पानी ऑफर किया, लेकिन MP ने साफ मना कर दिया।
उन्होंने कहा, “हम आपका पानी नहीं पीना चाहते। आप लोग पीड़ित का दर्द नहीं समझते। एक मां का बेटा मर गया है, और आप हमें पानी पिला रहे हैं।” सांसद ने पुलिस पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा, “अगर एक सांसद भी पीड़ित परिवार की आवाज नहीं उठा सकता, तो आम जनता को न्याय कैसे मिलेगा?” उन्होंने कहा कि पुलिस सिर्फ सत्ता पक्ष के दबाव में काम कर रही है और विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।
घटना की जानकारी मिलने पर समाजवादी पार्टी के समर्थक और कार्यकर्ता भी महिला थाने पहुंच गए। कुछ देर के लिए तनाव का माहौल रहा। हालांकि बाद में पुलिस ने सांसद को छोड़ दिया, लेकिन पूर्व राज्य मंत्री और सपा नेता मांगेराम कश्यप समेत चार अन्य को हिरासत में लेकर मेडिकल जांच के लिए सदर बाजार थाने भेज दिया गया।
क्या है मोनू कश्यप मर्डर केस?
पूरा मामला शामली जिले के कांधला थाना क्षेत्र के जसाला गांव का है। गांव का रहने वाला 25 साल का मोनू कश्यप 21 अप्रैल की रात पंजोखरा रेलवे लाइन के पास घायल मिला था। उसे पहले सेंट्रल हेल्थ सेंटर और बाद में मेरठ रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
मोनू की मां ने उसके दोस्तों सचिन और शुभम पर हत्या का आरोप लगाया। पुलिस जांच में पता चला कि घटना के समय दोनों आरोपी मोनू के साथ मौजूद थे। कॉल डिटेल्स और मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में पता चला कि मोनू की दो गर्लफ्रेंड थीं, और आरोपी चाहते थे कि मोनू उनमें से किसी एक से बात करवाए। इस बात को लेकर तीनों में पहले भी झगड़ा हुआ था। पुलिस के मुताबिक, घटना वाली रात तीनों रेलवे ट्रैक के पास बैठकर शराब पी रहे थे। झगड़ा बढ़ गया और आरोपियों ने कथित तौर पर मोनू को ट्रेन के सामने धक्का दे दिया। गंभीर रूप से घायल मोनू की बाद में मौत हो गई।
इस मामले को लेकर अब राजनीति तेज हो गई है। MP इकरा हसन ने साफ कहा है कि वह पीड़ित परिवार के साथ खड़ी हैं और उन्हें इंसाफ दिलाने के लिए हर लेवल पर आवाज उठाती रहेंगी। SP सिटी व्योम बिंदल ने बताया कि जानकारी मिली थी कि कुछ लोग DIG ऑफिस के बाहर सड़क जाम करने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस मौके पर पहुंची और जाम लगा रहे लोगों को हटाया, जिससे सड़क फिर से खुल गई। इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सही कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

