पांवधोई नदी का पानी हुआ जहरीला, बड़ी संख्या में मछलियों की मौत, करोड़ों खर्च के बाद भी डाला जा रहा फैक्ट्रियों से ज़हरीला पानी

Paondhoi River Water Turns Toxic, Massive Fish Die-off Reported Toxic, Effluents from Factories Continue to be Discharged Despite Crores in Expenditure.

सहारनपुर : स्मार्ट सिटी सहारनपुर के बीचों बीच बह रही पांवधोई में हुई मछलियों की मौत से एक बार फिर नगर निगम और प्रदूषण विभाग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पांवधोई नदी की सफाई में करोड़ों खर्च के बाद भी नदी में जहरीला पानी बह रहा है जिसके चलते लाखों मछलियों की मौत हो गई है। स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शहर में चल रही फैक्ट्रियाँ पांवधोई नदी में ज़हरीला कचरा डाल रही हैं। जिससे सहारनपुर की लाइफ लाइन कही जाने वाली पांवधोई अब न सिर्फ बीमारियों का कारण बन रही है वहीं नदी में रहने वाले जीवों की मौत का सबब बन गई है। यही वजह है कि संबंधित विभागीय अधिकारी इस मामले पर चुप्पी साधे हुए है।

आपको बता दें कि शहर के बीचों बीच बहने वाली पांवधोई नदी को सहारनपुर की लाइफ लाइन कहा जाता है। जिसकी सफाई के लिए हर साल करोड़ों रूपये नगर निगम के पास आते हैं बावजूद इसके पांवधोई नदी गंदे नाले की तरह देखी जा रही है। ऐतिहासिक धार्मिक स्थल बाबा लालदास के बाड़े से होकर बहने वाली पांवधोई नदी को शहर के लोग गंगा नदी की तरह पवित्र मानते हैं। पांवधोई नदी का उधगम शहर से करीब पांच किलोमीटर दूर शंकलापुरी से होता है। केवट अभियान के तहत सरकार पांवधोई नदी की साफ-सफाई के लिए विशेष पैकेज भेजती है। लेकिन पांवधोई नदी की सफाई महज फोटो खिंचवाने तक सिमित रहती है।

इतना ही नहीं कॉलोनियों से गंदे पानी के शिविर पाइप लाइन और फैक्टरियों से निकलने वाला गंदा प्रदूषित पानी पांवधोई में छोड़ा जा रहा है। जिसके चलते गुरूवार को पांवधोई नदी में लाखों मछलियों की मौत हो गई। धार्मिक संगठनों और स्थानीय निवासियों की एक बड़ी भीड़ मौके पर जमा हो गई। लोगों में भारी गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था और प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए गए। इस जगह को बाबा लालदास की तपोभूमि (तपस्या स्थल) के रूप में पूजा जाता है। जहाँ हर दिन हज़ारों श्रद्धालु मछलियों को दाना खिलाने आते हैं। नतीजतन, इतनी बड़ी संख्या में मछलियों की अचानक मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

नदी के किनारे के रख रखाव की देख रेख करने वाले महंत रामलाल तुली ने इस घटना को शर्मनाक और सोची-समझी साज़िश बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी ही एक घटना जिसमें ज़हरीले पदार्थ डालकर मछलियों को मारा गया था। पहले भी नवरात्रि के त्योहार के दौरान हुई थी लेकिन प्रशासन ने तब भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की थी। उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष जाँच और दोषियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय निवासी नीतू सैनी ने कहा कि यह सिर्फ़ मछलियों की मौत नहीं है बल्कि लोगों की धार्मिक आस्था पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि “लोग यहाँ बड़ी श्रद्धा के साथ मछलियों को दाना खिलाने आते हैं ऐसे में यह घटना बेहद दुखद और गुस्सा दिलाने वाली है।”

महात्मा रामदास आलोक बाबा ने गंभीर आरोप लगाया। जिससे स्थिति की गंभीरता और बढ़ गई। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह कोई सामान्य घटना नहीं है। किसी ने जान-बूझकर मछलियों को मारने के लिए पानी में ज़हर मिलाया है, जिसका मकसद इस क्षेत्र के सांप्रदायिक माहौल को बिगाड़ना था। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि कुछ लोग मरी हुई मछलियों को गैर-कानूनी तरीके से पकड़कर बेचने की साज़िश रच रहे हो सकते हैं। आलोक बाबा ने नदी के पानी की ओर इशारा किया, जो नीला पड़ गया था, और बताया कि खटाखेड़ी इलाके में स्थित जींस फैक्ट्रियों से निकलने वाला रसायन-युक्त दूषित पानी सीधे पावधोई नदी में छोड़ा जा रहा है। यदि यह बात सच है, तो यह न केवल घोर लापरवाही का मामला है, बल्कि संभावित रूप से एक पर्यावरणीय अपराध भी है।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि यह नदी न केवल मछलियों का, बल्कि कछुओं और अन्य जलीय जीवों का भी घर है, और अब इन सभी का जीवन खतरे में पड़ गया है। प्रशासन पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए निवासियों ने ज़ोर देकर कहा कि यदि समय रहते उचित निगरानी की गई होती, तो इस घटना को टाला जा सकता था।

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