लखनऊ : उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में तैनात 137000 से ज्यादा शिक्षामित्रों को जल्द ही उनके गृह जिलों में भेजा जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से अनुमति दे दी गई है। साथ ही विभाग को तत्काल प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश भी शासन से मिल गए हैं। शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया की तरह विभाग शिक्षामित्रों को भी उनके गृह जिलों या नजदीकी स्कूलों में भेजेगा। आइए जानते हैं इसके लिए क्या तरीका होगा।
पिछली सपा सरकार में प्रदेश में करीब 137000 शिक्षामित्रों को शिक्षक बनाया गया था। शिक्षक बनने पर उन्हें दूरदराज के ब्लॉकों में तैनाती दी गई थी। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उनका शिक्षक के तौर पर समायोजन रद्द कर दिया गया था। फिर वही शिक्षक उन्हीं स्कूलों में शिक्षामित्र बन गए। सुप्रीम कोर्ट द्वारा समायोजन रद्द किए जाने के बाद मौजूदा योगी सरकार ने इन शिक्षकों को 10 हजार रुपये मानदेय देने का फैसला किया था। इसके बाद से ये शिक्षक पिछले पांच साल से सरकार से मांग कर रहे हैं कि इतने कम मानदेय पर वे दूसरे जिलों में नहीं पढ़ा सकते। अगर उन्हें शिक्षामित्र रखना ही है तो सरकार उन्हें उनके गृह जिले में वापस भेजे।
इस साल जनवरी में सरकार ने इन शिक्षामित्रों को उनके मूल विद्यालय में वापस भेजने का आदेश जारी किया था। साथ ही कहा था कि अगर मूल विद्यालय में कोई पद खाली नहीं है तो उन्हें नजदीकी विद्यालय में समायोजित किया जाएगा। सरकार के आदेश के बावजूद अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। महानिदेशक बेसिक शिक्षा कंचन वर्मा ने छह जून को शासन को पत्र लिखकर समायोजन की अनुमति मांगी थी। इस पर शासन ने उन्हें फिर से अनुमति दे दी है।
इस संदर्भ में महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने बताया कि शिक्षकों के समायोजन व स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रदेश में जहां भी शिक्षकों की कमी है, वहां से डाटा एकत्र किया जाएगा। उसके आधार पर इन सभी शिक्षामित्रों को उनके जिलों में समायोजित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जिस भी जिले में जो भी पद रिक्त है, उस जिले में रहने वाले शिक्षामित्रों को वहां समायोजित किया जाएगा। बताया गया कि इसके लिए विभाग ऑनलाइन प्रक्रिया पर विचार कर रहा है। प्रयास यह है कि सभी जिलों के विद्यालयों में शिक्षामित्रों के रिक्त पद दर्शाए जाएं और उसी के अनुसार शिक्षामित्रों से ऑनलाइन आवेदन लिए जाएं और समायोजन किया जाए।
शिक्षामित्र पिछले 17 दिनों से लगातार राजधानी लखनऊ के आईके गार्डन में धरना दे रहे हैं। प्रदेश के सभी 75 जिलों के शिक्षामित्र स्थायी नौकरी के साथ समायोजन की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं। ये शिक्षामित्र उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की तरह यूपी में भी टीईटी और सीटीईटी पास को स्थायी करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि टीईटी कर चुके शिक्षामित्रों को योग्यता पूरी करने के बाद नौकरी में समान अवसर मिलना चाहिए। साथ ही शिक्षामित्रों को 12 महीने का उचित मानदेय मिलना चाहिए।
इसके साथ ही सरकार उन्हें मेडिकल और 14 दिन की सीएल छुट्टी आदि भी दे। साथ ही महिला शिक्षामित्रों के अंतर जिला तबादले का शेड्यूल जारी किया जाए। प्रदर्शन कर रहे शिक्षामित्रों का कहना है कि जब उन्हें शिक्षक बनाया गया था तो उनका स्कूल उनके गृह जिले से 300 किलोमीटर दूर आवंटित किया गया था। अब जब कोर्ट के आदेश के बाद वह फिर से शिक्षामित्र बन गए हैं तो उन्हें ₹10,000 में घर चलाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। CM Yogi News