अच्छी खबर : बांस यानि बैम्बू पर्यावरण के लिहाज़ से भी एक अद्भुत पौधा है। बांस अन्य सभी पौधों की अपेक्षा 35 फीसदी कार्बन डाइ आक्साइड ज्यादा ग्रहण करता है और करीब 35 फीसदी आक्सीजन ज्यादा देता है, जो आने वाले समय में जीवन जीने के लिए सबसे उपयोगी है। आज जिस प्रकार हर साल पेड़ कट रहे हैं और धरती पर गर्मी का प्रकोप बढ़ रहा है, उसे देखकर तो यही लगता है कि धरती पर मनुष्य ज्यादा समय तक जिंदा नहीं रह पाएंगे। ये एक गंभीर समस्या है।
हम प्रकृति से जल, हवा, अन्न. फल आदि ले तो रहे हैं, पर हम प्रकृति को दे क्या रहे हैं, केवल धुआं और प्रदूषण। अगर हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को कुछ अच्छा देना चाहते हैं, तो बांस से अच्छा कुछ नहीं है। सबसे बड़ी बात है कि बांस की फसल करीब तीन सालों में कटने के लायक हो जाती है, लेकिन इसके बेत को डेढ़ से दो साल में भी उपयोग में लाया जा सकता है। Good News
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बांस की फसल को एक बार लगा देने के बाद इसकी फसल से तीन पीढ़ियों को मुनाफा हो सकता है। इसकी फसल करीब 40 साल तक चलती रहती है। हालांकि बांस की अच्छी फसल लेने के लिए मेहनत की जरूरत होती है। बांस की खेती से कई सालों तक तो बंपर कमाई होती ही है, लेकिन अगर हम एक एकड़ की बात करें, तो इससे 4 साल में 20 लाख रुपए से 40 लाख रुपए तक कमाए जा सकते हैं। Good News
हालांकि बांस की बिक्री के लिए व्यापारियों से संपर्क पहले से ही किसान कर लें और अच्छा बाजार तलाश लें। लेकिन अच्छी बात ये है कि अगर किसान को कोई बांस खरीदने वाला व्यापारी नहीं मिलता है, तो खुद का बांस से बनने वाली वस्तुओं का लघु उद्योग खोल सकता है, जिससे आमदनी बढ़ भी बढ़ जाएगी। बांस की एक और खासियत ये है कि इसकी फसल कहीं भी हो जाती है, सिर्फ रेत में इसकी खेती नहीं हो पाती। Good News
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पश्चिम उत्तर प्रदेश के जिले बिजनौर में स्थित तोमर एग्रीकल्चर के मालिक और अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटर सुरजीत सिंह कहते हैं कि किसान भाई अपनी सामर्थ के अनुसार कुछ बांस के पौधे जरूर लगाएं, क्योंकि जिस क्षेत्र में बांस के पौधे ज्यादा लगे होते हैं, उस क्षेत्र में मनुष्य को सांस संबंधी रोग नहीं होते। अगर रोग है, तो बांस वाले क्षेत्र में रहने से वे रोग दूर हो जाएंगे। और जिस क्षेत्र में बांस के पौधे लगे होते हैं, वहां वर्षा भी ज्यादा होती है और उस जगह का वाटर लेवल भी बढ़ता रहता है। Good News
अगर हम कुछ बड़े क्षेत्र में बांस का बन लगा दें, तो आप आश्चर्यजनक परिणाम देखेंगे। जहां वाटर लेवल 80 या 100 फुट है वहां 25-30 फुट पर आ जाएगा। पश्चिम उत्तर प्रदेश में जलस्तर और गन्ना किसान की परेशानियों को देखते हुए बस की खेती गन्ने का एक अच्छा पर्याय हो सकती है इसलिए किसानों को इसकी खेती पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। बांस में और क्या चाहिए। बांस है, तो खास हैं। Good News
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