बहराइच: जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक बार फिर अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट और मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। बहराइच के दो दिवसीय दौरे के दौरान उन्होंने राम मंदिर में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति प्रक्रिया पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह पूरी प्रक्रिया लोगों को भ्रमित करने वाली है।
वन सरिता रिजॉर्ट में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में शंकराचार्य ने कहा कि जब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया गया था, तब किसी प्रकार की सार्वजनिक वैकेंसी नहीं निकाली गई थी। ऐसे में अब केवल सीईओ पद के लिए आवेदन मंगाना पारदर्शिता का नहीं, बल्कि जनता को भ्रमित करने का प्रयास है।
उन्होंने आरोप लगाया कि नियुक्ति पहले से तय होती है और बाद में औपचारिक प्रक्रिया पूरी की जाती है। उनका कहना था कि जिस व्यक्ति को नियुक्त करना होगा, अंततः उसी की नियुक्ति होगी। इसलिए वैकेंसी निकालना केवल औपचारिकता बनकर रह गया है।
शंकराचार्य ने राम मंदिर ट्रस्ट पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी दोहराए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर मंदिर के चढ़ावे और धन के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं, उन्हें जिम्मेदारी से हटाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, जब तक वर्तमान व्यवस्था में बदलाव नहीं होगा और धर्माचार्यों की भागीदारी वाली नई व्यवस्था नहीं बनेगी, तब तक श्रद्धालुओं का भरोसा पूरी तरह बहाल नहीं हो सकेगा।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के मंदिर की व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी, जवाबदेह और संत समाज के मार्गदर्शन में होनी चाहिए। इस तरह के संवेदनशील मामलों में निष्पक्षता सबसे अधिक जरूरी है।
हालांकि, शंकराचार्य के इन आरोपों पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उनके बयान के बाद राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।

