सहारनपुर : जमीयत के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने एक बयान जारी कर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इससे देश में गाय के नाम पर मॉब लिंचिंग और हिंसा की घटनाओं पर काफी हद तक रोक लग सकती है। सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, क्योंकि यह सिर्फ धार्मिक मुद्दा नहीं है, बल्कि सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का भी मामला है। जमीयत अध्यक्ष के इस बयान की काफी चर्चा हो रही है।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि भारत में गाय का खास महत्व है और अलग-अलग समुदायों के लोग इसका सम्मान करते हैं। अगर सरकार गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करती है, तो इससे समाज में एक अच्छा संदेश जाएगा और गाय के नाम पर फैली नफरत और तनाव को कम करने में मदद मिलेगी।
मदनी ने कहा कि देश में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं जहां गाय के नाम पर लोगों को निशाना बनाया गया है और हिंसा हुई है। किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। अगर सरकार साफ़ और सख़्त पॉलिसी बनाए तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं से देश की इमेज खराब होती है और सामाजिक मेलजोल कमज़ोर होता है।
उन्होंने यह भी कहा कि मुसलमानों को गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने पर कोई एतराज़ नहीं होगा। बल्कि, उन्हें खुशी होगी कि इस मुद्दे पर हो रही बहस और हिंसा की पॉलिटिक्स खत्म हो जाएगी। मदनी ने कहा कि कुछ लोग गाय के मुद्दे को पॉलिटिकल और इमोशनल हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि इसे इंसानियत और सामाजिक मेलजोल के नज़रिए से देखा जाना चाहिए।
मौलाना मदनी ने सभी समुदायों से शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश की ताकत आपसी एकता में है और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए समाज में प्यार और मेलजोल का माहौल बनाना सभी की ज़िम्मेदारी है। गौरतलब है कि देश में समय-समय पर गोरक्षा, गोहत्या कानून और मॉब लिंचिंग जैसे मुद्दों पर बहस होती रही है। कई राज्यों में गोहत्या पर बैन है, लेकिन गाय के नाम पर हिंसा की घटनाएं पॉलिटिकल और सोशल लेवल पर लगातार चर्चा का विषय रही हैं।

