रामपुर : समाजवादी पार्टी के सीनियर नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खान को 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए विवादित भाषण के मामले में कोर्ट ने दोषी ठहराया है। यह मामला एक चुनावी रैली में अधिकारियों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने और आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने से जुड़ा है। कोर्ट ने अलग-अलग धाराओं के तहत सजा और जुर्माना दोनों लगाया है।
गौरतलब है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान गठबंधन के उम्मीदवार मोहम्मद आजम खान ने रामपुर के मनकरा इलाके में एक चुनावी रैली को संबोधित किया था। आरोप है कि भाषण में अधिकारियों और प्रशासनिक सिस्टम के खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी की गई थी। तत्कालीन ARO घनश्याम त्रिपाठी ने सिविल लाइंस थाने में केस दर्ज कराया था। बाद में जांच में पता चला कि घटना भोट थाना इलाके में हुई थी, जिसके बाद केस वहां ट्रांसफर कर दिया गया था। प्रॉसिक्यूशन ऑफिसर राकेश कुमार मौर्य के मुताबिक, प्रॉसिक्यूशन ने कोर्ट में कुल 10 गवाह पेश किए। सारे सबूत और दलीलें सुनने के बाद, कोर्ट ने मोहम्मद आज़म खान को दोषी पाया।
कोर्ट ने उन्हें इंडियन पीनल कोड के सेक्शन 153A के तहत दो साल जेल और ₹5,000 का जुर्माना, सेक्शन 153B के तहत दो साल जेल और ₹5,000 का जुर्माना, और सेक्शन 505(2) के तहत दो साल जेल और ₹5,000 का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने रिप्रेजेंटेशन ऑफ़ द पीपल एक्ट के सेक्शन 125 के तहत भी दो साल जेल और ₹5,000 का जुर्माना लगाया, जो मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट के उल्लंघन से जुड़ा है। प्रॉसिक्यूशन ऑफिसर ने कहा कि भाषण के दौरान “कलेक्टर-फ्लेक्टर” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था, जिसे कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए माना। इस फैसले से रामपुर में राजनीतिक उथल-पुथल मच गई है, और मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।

