नई दिल्ली : दिल्ली-NCR समेत पूरे देश में पेट्रोल, डीज़ल और CNG की कीमतें बढ़ा दी गई हैं। शुक्रवार रात से लागू हुए नए रेट्स का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ने की उम्मीद है। करीब चार साल बाद फ्यूल की कीमतों में इस बड़ी बढ़ोतरी ने कंज्यूमर्स, गाड़ी चलाने वालों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर के बीच चिंता बढ़ा दी है।
राजधानी दिल्ली में रेगुलर पेट्रोल की कीमत ₹94.77 प्रति लीटर से बढ़कर लगभग ₹97.91 प्रति लीटर हो गई है। डीज़ल की कीमतें ₹87.67 से बढ़कर लगभग ₹90.78 प्रति लीटर हो गई हैं। CNG कंज्यूमर्स पर भी इसका असर पड़ा है। CNG की कीमत में ₹2 प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई है, जिससे नया रेट ₹79.09 प्रति किलोग्राम हो गया है।
प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। पहले जहां कीमत ₹102 से ₹104 प्रति लीटर थी, वहीं अब यह बढ़कर ₹105.14 से ₹107.14 प्रति लीटर हो गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने शुक्रवार सुबह नए रिटेल रेट जारी किए, जिसके बाद उसी रात से सभी पेट्रोल पंपों पर नई कीमतें लागू हो गईं।
इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों को फ्यूल की कीमतों में इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण बताया जा रहा है। सरकारी तेल कंपनियों का दावा है कि कीमतें लंबे समय से स्थिर थीं, जबकि ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें लगातार महंगी हो रही थीं। कंपनियों के मुताबिक, मौजूदा रेट पर उन्हें हर दिन लगभग ₹1,000 करोड़ का नुकसान हो रहा था।
इससे पहले, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी संकेत दिया था कि तेल कंपनियों पर बढ़ते दबाव के कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा था कि अगर रिटेल कीमतों में बदलाव नहीं किया गया, तो तेल कंपनियों का नुकसान एक ही तिमाही में ₹1 लाख करोड़ से ज़्यादा हो सकता है। उनके इस बयान के बाद, कयास लगाए जा रहे थे कि जल्द ही फ्यूल की कीमतें बढ़ाई जाएंगी।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि पेट्रोल और डीज़ल की बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ़ गाड़ी चलाने वालों तक ही नहीं होगा, बल्कि रोज़मर्रा की चीज़ों पर भी पड़ेगा। ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बढ़ने से खाने-पीने की चीज़ें, सब्ज़ियाँ, दूध और दूसरी ज़रूरी चीज़ों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। इस बीच, CNG की बढ़ती कीमतों से ऑटो, टैक्सी और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का किराया बढ़ने की उम्मीद है।
दिल्ली-NCR में लाखों लोग रोज़ाना प्राइवेट गाड़ियों और CNG से चलने वाले ट्रांसपोर्ट पर निर्भर हैं। इसलिए, फ्यूल की कीमतों में यह बढ़ोतरी आम आदमी के महीने के बजट पर सीधा असर डालेगी। अब सबकी नज़रें सरकार और तेल कंपनियों के अगले कदमों पर हैं।

