सहारनपुर : सहारनपुर के गांव सुल्तानपुर में किसान द्वारा आत्मघाती कदम उठाने पर नकुड़ से बीजेपी विधायक ने जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए है। नकुड़ विधायक मुकेश चौधरी ने घटना के लिए जिला प्रशासन को जिम्मेदार बताया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा स्तर के दौरान उन्होंने लखनऊ से डीएम-और एसडीएम सदर को पैमाइश करने से यह कह कर मना किया था कि इस मामले को पंचायत में निपटाया जा सकता है। दोनों पक्षों से इस बाबत बात हो चुकी है। बावजूद इसके एसडीएम सदर राजस्व विभाग की टीम और पुलिस फ़ोर्स के साथ पैमाइश करने पहुंच गए। जिससे आहात किसान सरदार वेद प्रकाश ने आत्मदाह का प्रयास किया। जिससे वह पूरी तरह झुलस गया। किसान की इस हालत के लिए एसडीएम और जिला प्रशासन जिम्मेदार है।
आपको बता दें की सिख समुदाय के सरदार वेदप्रकाश का जैन मंदिर से लगी जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। मामला अदालत में विचाराधीन है। बावजूद इसके शनिवार को तहसील सदर एसडीएम अंकुर वर्मा राजस्व विभाग की टीम के साथ विवादित जमीन की पैमाइश करने पहुंचे थे। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में पैमाइश करनी शुरू कर दी। इस दौरान पैमाइश से नाराज किसान वेदप्रकाश ने अपने ऊपर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा ली। किसान के आत्मघाती कदम से मुके पर अफरा तफरी मच गई। मौके पर मौजूद तहसील अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। पुलिस कर्मियों ने जैसे तैसे किसान में लगी आग को बुझाया और अस्पताल में भर्ती कराया। जहां से डॉक्टरों ने गंभीर हालत में दिल्ली हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया।
इस मामले में नकुड़ से भाजपा विधायक मुकेश चौधरी ने जिला प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। विधायक मुकेश चौधरी ने कहा कि सुल्तानपुर गांव में सिख समुदाय और जैन समुदाय के बीच जमीनी विवाद लंबे समय चला आ रहा था। एक-दो महीना पहले नायब तहसीलदार टीम के साथ गये थे उस वक्त एक महिला ने छत पर चढ़ कर हंगामा किया था। उस दौरान यह मामला उनके संज्ञान में आया था जिसके बाद इस मामले को उन्होंने पंचायत में निपटाने का आश्वासन दिया था। दोनों पक्षों को अपने आवास पर बुलाया था जहां दोनों पक्षों के दस्तावेज देखे गए और मामला निस्तारण के प्रयास किए जा रहे थे।
विधानसभा सत्र के दौरान 26 या 27 फरवरी को उनके पास फोन आया था। जिसमे बताया गया कि तहसील प्रशासन जमीन की पैमाइश कर कब्जा दिलाने आ रहा है। जिसके बाद उन्होंने डीएम और एसडीएम दोनों अधिकारियों को फोन पर बात कर कहा कि अभी वहां जबरदस्ती कोई कार्यवाई करने की जरूरत नहीं है। मैं लखनऊ से सहारनपुर आने के बाद स्वंम रहकर पैमाइश करा दूंगा। चाहे प्राइवेट आर्किटेक्ट से करानी पड़े लेकिन जोर जबरदस्ती नहीं करनी।
शनिवार को वे लखनऊ से सहारनपुर पहुंचे तो सिख पक्ष उनसे मिलने पहुंचा था। उसी वक्त पता चला कि एसडीएम सदर तहसील अधिकारियों और पुलिस फ़ोर्स के साथ गांव पहुँच गए और पैमाइश शुरू कर दी है। इसी दौरान किसान ने यह आत्मघाती कदम उठा लिया। ऐसी घटना होना मामूली बात नहीं है, यह घटना निंदनीय है। यह विवादित आपसी पंचायत से ही निपटाया जा सकता है। दोनों पक्ष का कहना था कि किसी का एक इंच भी हिस्सा नहीं लेना चाहता। विवादित जमीन किसकी है यह जांच का विषय है। मैंने तो डीएम और एसडीएम को मौके पर जाने से रोका था। लेकिन उनकी मनमानी से आज एक किसान जिंदगी मौत की जंग लड़ रहा है। इसके लिए प्रशासन की बड़ी लापरवाही है।