महाकुम्भ 2024 : प्रयागराज में महाकुंभ मेले की तैयारियां जोरों पर चल रही है। धर्म ध्वजारोहण के साथ पेशवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके साथ ही संन्यास की कठिन तपस्या के लिए श्रद्धालु गुरु के चरणों में अर्जी लगा रहे हैं। वे अपने पितरों का श्राद्ध और खुद का पिंडदानकरने का मन बना चुके हैं। कुंभ मेले में काशी समेत विभिन्न प्रांतों से नागा साधु और ब्रह्मचारी बनाए जाएंगे। इसमें काशी से दो हजार संन्यासी बनाए जाएंगे।
आपको बता दें कि इस बार प्रयागराज के महाकुम्भ मेले में विभिन्न अनुष्ठानों के साथ ही 24 घंटे का उपवास रखकर संन्यासी का जीवन अपनाएंगे। इस दौरान 13 अखाड़े आठ हजार से अधिक श्रद्धालुओं को साधु, संत और ब्रह्मचारी बनाएंगे। काशी से भी करीब दो हजार श्रद्धालु संन्यासी बनेंगे। नागा साधु, संत और ब्रह्मचारी बनाने का काम अखाड़े करते हैं।
ये भी पढ़िए…. अखाड़ा परिषद का बड़ा बयान, महाकुंभ में मुसलमानों का प्रवेश हो वर्जित, हो सकता है साधु-संतो का धर्म भ्रष्ट
दरसअल अर्धकुंभ और महाकुंभ में लोग सबसे ज्यादा संन्यास लेते हैं। इस बार भी महाकुंभ में देशभर से नागा साधु और ब्रह्मचारी बनाए जाएंगे। हर अखाड़ा अलग-अलग शुभ मुहूर्त में उन्हें संन्यास ग्रहण कराएगा। श्रीशंभू पंचदशनाम आह्वान अखाड़े के श्रीमहंत बटेश्वर भारती महाराज ने बताया कि अखाड़े के नियमों के अनुसार सभी कर्मकांड पूरे करने के बाद ही उन्हें संन्यास ग्रहण कराया जाता है। इस दौरान अखाड़ों की उपाधि भी दी जाती है।
रात्रि में दंड और जनेऊ को गंगा में विसर्जित करने के बाद महामंडलेश्वर उन्हें दीक्षा देते हैं। इस दौरान 24 घंटे का व्रत रखा जाता है। शरीर पर भगवान शिव की अखंड भस्म लगाई जाती है। 24 घंटे तक महावाक्य का जाप किया जाता है। इसके बाद रुदथ कंठी धारण की जाती है।
अब उन्हें संन्यासी का जीवन अपनाने के लिए आधार की जांच की जाती है। अखाड़े उनका नाम, पता आदि सत्यापित करने के बाद ही उन्हें दीक्षा देते हैं। बटेश्वर भारती महाराज ने बताया कि अगर उनका नाम और पता सही नहीं पाया जाता है और वे गलत स्वभाव के हैं तो उन्हें संन्यास ग्रहण करने की अनुमति नहीं दी जाती है।