आगरा : बांके बिहारी कॉरिडोर के लिए 510 करोड़ रुपये दान देने का हलफनामा देकर सुर्खियों में आए बिल्डर प्रखर गर्ग को उनकी पत्नी राखी गर्ग समेत गिरफ्तार कर लिया गया है। 1.54 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में कोर्ट ने आरोपी दंपत्ति के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। पुलिस ने बुधवार को दोनों को जयपुर से गिरफ्तार किया। दोनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी दंपत्ति के खिलाफ हरीपर्वत और कमला नगर थाने में धोखाधड़ी के 4 मुकदमे दर्ज हैं। चेक बाउंस के भी दो दर्जन से ज्यादा मुकदमे हैं। इनमें करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के आरोप शामिल हैं।
हरीपर्वत की द्वारिकापुरम कॉलोनी निवासी प्रखर गर्ग को भी ढाई साल पहले चेक बाउंस के एक मामले में वारंट जारी होने पर गिरफ्तार किया गया था। बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर के लिए 510 करोड़ रुपये देने का शपथ पत्र देने के बाद मथुरा पुलिस ने आगरा पुलिस से बिल्डर का रिकॉर्ड मांगा था। पुलिस ने रिपोर्ट सौंप दी है। बताया गया कि प्रखर गर्ग को वर्ष 2022 में जेल भेजा गया था। चेक बाउंस के मामले में कोर्ट ने उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए थे। तबीयत बिगड़ने पर प्रखर गर्ग को एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। अक्तूबर 2024 में उसके खिलाफ हरीपर्वत और कमला नगर थाने में धोखाधड़ी के मुकदमे दर्ज हुए थे। वर्ष 2023 में बैटरी कारोबारी अरुण सोंधी ने 1.54 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में प्रखर गर्ग व अन्य के खिलाफ चेक बाउंस का मुकदमा दर्ज कराया था।
डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि बिल्डर के खिलाफ चेक बाउंस का मुकदमा दर्ज किया गया था। उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। कोर्ट के आदेश पर पति-पत्नी को जेल भेज दिया गया है। आरोपी प्रखर गर्ग के खिलाफ 2019 से 2023 तक 138 एनआई एक्ट के तहत 21 मुकदमे दर्ज हुए। इनमें से कई मुकदमे कोर्ट में विचाराधीन हैं। आरोप लगे थे कि पैसा लेने के बाद वापस नहीं किया गया। कई मामलों में संपत्ति खरीदने के बाद पैसा न देने के आरोप लगे। मांगने पर चेक दिए गए। बैंक में जमा करने पर वे बाउंस हो गए। इस पर लोगों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जनवरी में पुलिस ने आरोपी बिल्डर के द्वारिका पुरम स्थित घर पर नोटिस चस्पा किया था। मुनादी भी कराई गई थी। अक्टूबर 2023 में बिल्डर ने वृंदावन के बांके बिहारी कॉरिडोर के लिए 510 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव हाईकोर्ट में रखा था। इससे उसने खूब सुर्खियां बटोरी थीं।
पुलिस ने कुंडली खंगाली तो एनआई एक्ट के तहत कई मुकदमे दर्ज मिले। दिसंबर 2024 में ईडी की टीम लखनऊ से आई और उसके घर पर छापा मारा। अक्टूबर 2024 में परिचित बैटरी कारोबारी अरुण सोंधी ने आरोपी बिल्डर प्रखर गर्ग के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था। अरुण सोंधी ने बताया कि उन्होंने द्वारिका पुरम कॉलोनी में एक प्रॉपर्टी बेची थी। वर्ष 2019 में प्रखर गर्ग ने रजिस्ट्री कराई थी। इसके एवज में उन्होंने 1.54 करोड़ रुपये के चेक दिए थे। उन्होंने चेक बैंक में जमा कर दिए। लेकिन अगले ही दिन चेक बाउंस हो गए। पैसे मांगने पर प्रखर गर्ग उन्हें टालमटोल करता रहा। 4 साल बाद उन्होंने मुकदमा दर्ज कराया। इसमें उन्होंने 9 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया। प्रखर गर्ग के साथ उनकी पत्नी राखी गर्ग, सतीश गुप्ता, सुमित कुमार जैन और मुकेश जैन को नामजद किया गया। पुलिस इसकी जांच कर रही थी। कई लोगों के नाम सामने आए थे।
इससे पहले वर्ष 2021 में हरीपर्वत थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था। इसमें पुलिस जांच कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इसमें भी प्रखर गर्ग के साथ उसकी पत्नी राखी और दो अन्य को आरोपी बनाया गया था। धोखाधड़ी और पैसों के गबन का आरोप लगाया गया था। 138 एनआई एक्ट के मामले में एडीजे-6 की कोर्ट में सुनवाई चल रही है। आरोपी बिल्डर दंपती कोर्ट में पेश नहीं हो रहा था। पुलिस काफी समय से उनकी तलाश कर रही थी। 20 अगस्त को दोनों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हुए थे।
अरुण सोंधी ने बताया कि बिल्डर की धोखाधड़ी से उन्हें काफी नुकसान हुआ। यहां तक कि उनका मकान भी बिक गया। केस दर्ज होने के बाद भी आरोपी ने पैसे नहीं लौटाए। धोखाधड़ी के अभी और पीड़ित सामने आ सकते हैं। आरोपी बिल्डर के खिलाफ कमला नगर थाने में दो केस दर्ज हैं। इनमें से एक केस 30 दिसंबर 2023 को लिखा गया था। इसे कमला नगर निवासी सुभाष शर्मा ने लिखाया था। इसमें प्रखर गर्ग, उनकी पत्नी राखी, कल्पतरु मोटल्स लिमिटेड औरंगाबाद, मथुरा के दीपक कपूरिया, विश्वनाथ प्रताप, नव होटल की नीतू कुशवाह, अनुज सिंह को नामजद किया गया है। इसमें प्रॉपर्टी बेचने का सौदा करके पैसे हड़पने का आरोप लगाया गया है।
दूसरा मुकदमा ट्रांस यमुना निवासी योगेश अग्रवाल ने 30 सितंबर 2024 को दर्ज कराया था। उन्होंने प्रखर गर्ग, अमित शुक्ला और रामबाबू सिंह को नामजद किया था। आरोप था कि आरोपी वर्ष 2015 में उनके घर आए थे। इसमें प्रॉपर्टी के नाम पर 90 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था। मुकदमों के बाद बिल्डर ने कोर्ट की शरण ली थी। डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि दोनों मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। आरोपी बिल्डर ने हाईकोर्ट से अपनी गिरफ्तारी पर स्टे ले लिया था।
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