प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) को सम्मिलित राज्य अभियंत्रण सेवा (मुख्य परीक्षा) आयोजित करने से रोकने वाले एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि आयोग मुख्य परीक्षा आयोजित कर सकता है, लेकिन उसके परिणाम जारी नहीं किए जाएँगे। इससे पहले एकल पीठ ने मुख्य परीक्षा के आयोजन पर रोक लगाते हुए प्रारंभिक परीक्षा 2024 के परिणामों में संशोधन का आदेश दिया था। एकल पीठ ने कहा था कि आयोग पहले प्रारंभिक परीक्षा के संशोधित परिणाम जारी करे और फिर उस परिणाम के आधार पर मुख्य परीक्षा आयोजित करे।
आयोग ने इस आदेश के खिलाफ विशेष अपील दायर की थी। शुक्रवार को वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने न्यायमूर्ति एम.सी. त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अनीस कुमार गुप्ता की पीठ के समक्ष अपील पर सुनवाई का अनुरोध किया। अपील स्वीकार करते हुए खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश पर आंशिक रूप से रोक लगा दी और मुख्य परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दे दी।
अभ्यर्थी रजत मौर्य और 41 अन्य द्वारा दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि यूपीपीएससी ने प्रारंभिक परीक्षा परिणाम तैयार करते समय आरक्षण के “माइग्रेशन” (स्थानांतरण) के सिद्धांत का पालन नहीं किया। इस नियम के तहत, आरक्षित श्रेणी के ऐसे अभ्यर्थी जिन्होंने मेरिट के आधार पर अनारक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों के बराबर या उनसे अधिक अंक प्राप्त किए हों, उन्हें अनारक्षित सूची में शामिल किया जाना चाहिए।
याचिकाकर्ताओं ने शिकायत की कि आयोग ने कुल 609 रिक्तियों के लिए 1:15 के अनुपात में पर्याप्त संख्या में अभ्यर्थियों को सफल घोषित नहीं किया क्योंकि उसने श्रेणीवार परिणाम तैयार किए और उच्च मेरिट वाले आरक्षित अभ्यर्थियों को अनारक्षित सूची में शामिल नहीं किया।
इन तर्कों को स्वीकार करते हुए, एकल पीठ ने यूपीपीएससी को प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की मेरिट सूची पुनः तैयार करने और माइग्रेशन के सिद्धांत को लागू करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आयोग को संशोधित प्रारंभिक परीक्षा परिणाम जारी करने के बाद ही अगले चरण, मुख्य परीक्षा, आयोजित करने की अनुमति दी जाएगी।

