पटना : भूमि अधिग्रहण और किसानों की समस्याओं को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले सोमवार (25 अगस्त) को हजारों किसान पटना की सड़कों पर उतर आए। संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में 11 किसान संगठनों ने बुद्ध स्मृति पार्क से मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी किसान मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने निकले थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें डाक बंगला चौराहे पर ही रोक दिया। संयुक्त मोर्चा के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे किसानों का आरोप है कि राज्य सरकार भूमि अधिग्रहण के नाम पर किसानों की उपजाऊ जमीन जबरन हड़पना चाहती है। कई जिलों में अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन मुआवजे की दर बहुत कम तय की गई है। किसानों का कहना है कि जमीन उनकी जीवन रेखा है, जिससे वे अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। अगर जमीन छीन ली गई, तो उनके पास रोजगार का कोई साधन नहीं बचेगा।
हरियाणा से संयुक्त किसान मोर्चा के नेता प्रदीप हुड्डा का कहना है कि वे सरकार से अपने भविष्य की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। किसानों की मांग है कि कोयल नहर परियोजना, जहाँ पानी नहीं पहुँच रहा है, वहाँ बिहार के कई इलाके बाढ़ग्रस्त हैं। अगर बाढ़ के पानी का सही इस्तेमाल हो जाए तो पूरा बिहार हरा-भरा हो जाएगा। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता प्रदीप हुड्डा ने कहा, “बाढ़ का पानी है, अगर उस पानी कोयल नहर बाँध में डाल दिया जाए तो दोनों इलाके हरे-भरे हो जाएँगे। तमाम समस्याओं के बाद भी अगर किसान खेती करता है तो उसे उसकी फसल का दाम नहीं मिलता। सरकार जब चाहती है किसानों की ज़मीन पर कब्ज़ा कर लेती है और उसे उचित मुआवज़ा नहीं मिलता। किसान कुछ नहीं माँग रहा, बस अपना हक़ माँगने सड़क पर आया है।”
अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे किसान नेताओं का कहना है कि पिछले वर्षों में कई बार सरकार से मांग की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब किसानों के पास सड़कों पर उतरने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। संयुक्त किसान मोर्चा ने ऐलान किया है कि अगर सरकार उनकी मांगें नहीं मानती है, तो आने वाले दिनों में राज्यव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। बिहार सरकार ने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण शुरू कर दिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने ज़मीन के मुआवजे की राशि तय करने के लिए ज़िला स्तर पर पाँच सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति ज़मीन के मुआवजे की दर के साथ-साथ ज़मीन की श्रेणी भी तय करती है।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने गाँव की ज़मीन को सात श्रेणियों में बाँटा है। व्यावसायिक भूमि, औद्योगिक भूमि, आवासीय भूमि, राजमार्गों और मुख्य सड़कों के दोनों ओर की भूमि, सिंचित भूमि, असिंचित भूमि, तथा रेतीली, पथरीली और चंवर की भूमि। शहर की भूमि को छह श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इनमें मुख्य भूमि पर स्थित व्यावसायिक और आवासीय भूमि शामिल है। राजद सांसद सुधाकर सिंह ने कहा, “किसानों की भूमि का अधिग्रहण पैसा मिलने के बाद ही किया जाना चाहिए। अभी सरकार जो भी भूमि अधिग्रहण कर रही है, वह बिना पैसा दिए हो रही है। किसानों को उनका पैसा तभी मिलता है जब वे अपने मुआवजे के लिए मुकदमा दायर करते हैं, इसीलिए हम सरकार की सभी साजिशों का पर्दाफाश करने के लिए पटना की सड़कों पर उतरे हैं।” इस विरोध प्रदर्शन में शामिल 11 किसान संगठनों ने किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार से एक संयुक्त माँग की है, जिसकी मुख्य माँग है-
किसानों की भूमि का अधिग्रहण उनकी सहमति से ही किया जाए। अधिग्रहित भूमि का मुआवजा बाजार मूल्य से चार गुना अधिक दिया जाए। भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों को रोजगार और पुनर्वास की ठोस गारंटी दी जाए। जबरन अधिग्रहण की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए। अधिग्रहित की जाने वाली भूमि का उचित वर्गीकरण किया जाए ताकि बाजार दर पर मुआवजा दिया जा सके। मुआवजा राशि प्राप्त होने के बाद ही भूमि का अधिग्रहण किया जाए। उत्तर कोयल नहर परियोजना के कुटकु बांध में गेट लगाए जाएं। एमएलपी को कानूनी गारंटी मिले। बिहार की सभी अधूरी सिंचाई परियोजनाओं को तुरंत शुरू किया जाए। किसानों को कृषि कार्य के लिए मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जाए।
इस विरोध प्रदर्शन में शामिल 11 किसान संगठनों ने किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार से एक संयुक्त माँग की है, जिसमें मुख्य माँग है-
- किसानों की ज़मीन का अधिग्रहण उनकी सहमति से ही किया जाए।
- अधिग्रहित ज़मीन का मुआवज़ा बाजार मूल्य से चार गुना ज़्यादा दिया जाए।
- भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों को रोजगार और पुनर्वास की ठोस गारंटी दी जाए।
- जबरन अधिग्रहण की प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए।
- अधिग्रहित की जाने वाली भूमि का उचित वर्गीकरण किया जाए ताकि बाजार दर पर मुआवजा दिया जा सके।
- मुआवजा राशि प्राप्त होने के बाद ही भूमि का अधिग्रहण किया जाए।
- उत्तर कोयल नहर परियोजना के कुटकु बांध में गेट लगाए जाएं।
- एमएलपी को कानूनी गारंटी मिले।
- बिहार की सभी अधूरी सिंचाई परियोजनाओं को तुरंत शुरू किया जाए।
- किसानों को कृषि कार्य के लिए मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जाए।