मुख्यमंत्री ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी समाज हर युग में देश की रक्षा और संस्कृति के संरक्षण के लिए अग्रिम पंक्ति में खड़ा रहा है। जब भगवान राम वनवास में थे और माता सीता का अपहरण हुआ था, तब उनके पास अयोध्या या जनकपुर की सेना नहीं थी। उस समय आदिवासी समाज ने उनके साथ मिलकर रावण के विरुद्ध युद्ध लड़ा था। इसी प्रकार, महाराणा प्रताप ने अरावली के जंगलों में विचरण करते हुए आदिवासी समाज की मदद से अपनी सेना का पुनर्गठन किया और अकबर से युद्ध किया। छत्रपति शिवाजी ने भी वनवासी समाज के सहयोग से हिंदवी साम्राज्य की स्थापना की थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की विरासत और धरोहर कोसंजोए रखने में आदिवासी समाज की सदैव महत्वपूर्णभूमिका रही है। हम अक्सर देश की वर्तमान स्वतंत्रता कोएक राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में देखते हैं, लेकिन आदिवासीसमाज ने हर युग में सनातन धर्म की रक्षा के लिए संघर्षकिया है। बिरसा मुंडा ने छोटी सी उम्र में ही धरती माताऔर गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने का संदेश दिया,जो आज भी प्रेरणा देता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा में किसी प्रकार का जाति, धर्म या संप्रदाय का भेदभाव नहीं होता। आज कांवड़ यात्रा श्रद्धापूर्वक चल रही है, लेकिन कुछ लोग इसे उपद्रवी कहते हैं। यही वह वर्ग है जो आदिवासियों को भड़काता है। हमें इनसे सावधान रहना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जौनपुर में नियमों की धज्जियाँ उड़ाकर जबरदस्ती एक ऊँचा ताजिया बनाया गया, जो हाईटेंशन तार की चपेट में आ गया और तीन लोगों की मौत हो गई, फिर सड़क जाम कर दी गई। इस पर पुलिस ने पूछा कि क्या करें, तो मैंने कहा कि इन्हें लाठियों से मारो और बाहर फेंक दो, क्योंकि ‘ये लातों के भूत हैं, बातों से नहीं मानेंगे।’
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारें आदिवासी समाज को सरकारी सुविधाएँ और संचार उपलब्ध कराने में कमी करती रही हैं। जहाँ संचार बाधित होगा, वहाँ संघर्ष की स्थिति उत्पन्न होगी। हमारी सरकार ने 2017 के बाद आदिवासी गाँवों को राजस्व ग्राम का दर्जा दिया। 1947 से 2017 तक इन गाँवों में वोट देने का अधिकार नहीं था। हमने राशन कार्ड, ज़मीन का पट्टा और पेंशन जैसी सुविधाएँ दीं। सोनभद्र, चंदौली, मिर्ज़ापुर और नेपाल के तराई क्षेत्र में जनजातीय समाज को योजनाओं से जोड़ा गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज वेदों की शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात करता है। हम पेड़ों और नदियों की पूजा करते हैं, लेकिन उन्हें काटने या उन पर कब्ज़ा करने में संकोच नहीं करते, लेकिन जनजातीय समाज ने वेदों की शिक्षाओं को प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर जिया है। भारत की परंपरा में यह कभी नहीं कहा गया कि केवल मंदिर जाने वाला या शास्त्रों को मानने वाला ही हिंदू है। जो मानता है वह भी हिंदू है और जो नहीं मानता वह भी हिंदू है। चार्वाक और भगवान बुद्ध वेदों को नहीं मानते थे, फिर भी वे हमारे लिए पूजनीय हैं। जनजातीय समाज के साथ यह प्रश्न क्यों उठाया जाता है?
सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने जनजातीय समाज के मन में विश्वास पैदा किया है। यह हमारा मूल समाज है। जनजातीय गौरव दिवस का उद्देश्य उनसे संवाद करना और कृतज्ञता व्यक्त करना है। सरकार ने कोल जनजाति जैसे समुदायों को योजनाओं से शत-प्रतिशत जोड़ने का काम किया है। उन्होंने कहा कि हमने भगवान राम की विरासत से जुड़ी कोल जनजाति को संतृप्त करने का प्रयास किया। हमारा दायित्व है कि हम उनके बीच जाकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा करें।