स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दिया बड़ा बयान, बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के लिए भारत द्वारा शेख हसीना को शरण देने को ठहराया ज़िम्मेदार 

Swami Avimukteshwaranand made a strong statement

सहारनपुर : उत्तराखंड के जोशीमठ स्थित ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने न सिर्फ़ सरकार की कड़ी आलोचना की, बल्कि हिंसा के लिए भारत द्वारा बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को शरण देने को भी ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को शेख हसीना को शरण देने के संबंध में संसद में एक प्रस्ताव पेश करना चाहिए था। उन्होंने SIR सर्वे पर भी सवाल उठाया।

गौरतलब है कि उत्तराखंड के जोशीमठ स्थित ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सिद्धपीठ माँ शाकंभरी देवी के प्रकटोत्सव में शामिल होने आए थे। शाकंभरी देवी स्थित शंकराचार्य आश्रम में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के लिए बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के लोगों ने शेख हसीना को देश से बाहर निकाल दिया था। उसके बाद वह भारत आईं, जहाँ वह रेड कार्पेट पर चल रही हैं और शॉपिंग कर रही हैं। इसके वीडियो सोशल मीडिया के ज़रिए बांग्लादेश पहुँच रहे हैं, जिससे वहाँ के लोगों में गुस्सा भड़क रहा है।

उन्होंने कहा कि शेख हसीना ने औपचारिक रूप से भारत से शरण नहीं माँगी और सीधे भारत आ गईं। शरण देना भारत की परंपरा है। लेकिन सरकार ने लोकसभा सत्र के दौरान इस संबंध में कोई प्रस्ताव भी पेश नहीं किया। उन्होंने कहा कि जिस महिला को बांग्लादेश से निकाल दिया गया था, उसे भारत में शरण दी गई है, जिससे वहाँ के लोगों में भारत के प्रति नफ़रत पैदा हो रही है। बांग्लादेश के लोगों की भारत के प्रति भावनाएँ पहले दोस्ताना थीं, लेकिन अब वे नफ़रत में बदल रही हैं। अगर भारत सरकार इस मामले में कार्रवाई नहीं करती है, तो बांग्लादेश भी पाकिस्तान की तरह हमला करना शुरू कर देगा।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और बांग्लादेश का DNA एक ही है, और ऐसी स्थिति में बांग्लादेश भी पाकिस्तान जैसा व्यवहार करना शुरू कर देगा। भारत सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए ताकि बांग्लादेश फिर से पाकिस्तान का हिस्सा न बन जाए। SIR (सिस्टमैटिक इन्वेस्टिगेशन ऑफ़ रजिस्ट्रेशन) के बारे में एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अगर चुनाव आयोग मतदाता सूची को पारदर्शी बनाना चाहता है, तो न तो सत्ताधारी पार्टी और न ही विपक्ष को कोई आपत्ति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वैध वोटों को खारिज करना और फर्जी वोट बनाना, दोनों ही देश के खिलाफ अपराध हैं। उन्होंने आगे कहा कि 1.5 अरब की आबादी में ये 210 मिलियन लोग कहाँ से और कैसे आए, इसकी पूरी जांच होनी चाहिए।

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