दिल्ली : सर्वोच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए पहले कर्मचारियों की भर्ती में एससी यानी अनुसूचित जाति, एसटी यानी अनुसूचित जनजाति वर्गों के लिए आरक्षण लागू किया और जब ओबीसी वर्ग को भी आरक्षण देने की मांग उठी, तो अब ओबीसी यानी अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए भी आरक्षण लागू कर दिया है।
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने यहाँ कर्मचारियों की भर्ती में एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों के साथ-साथ शारीरिक रूप से विकलांग यानी दिव्यांगों, पूर्व सैनिकों और स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों के लिए भी आरक्षण का प्रावधान किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने पहली बार कर्मचारियों की भर्ती में आरक्षण लागू करने के इस फैसले को लागू किया है, जिससे आरक्षण पाने वाले वर्गों में खुशी है।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता बलराज सिंह मलिक ने अपनी जनहित याचिका में सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई को लिखा था कि सभी हस्ताक्षरकर्ता 23 जून, 2025 को अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए गैर-न्यायिक कर्मचारी पदों पर सीधी भर्ती और पदोन्नति में औपचारिक आरक्षण नीति लागू करने के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए आपके समक्ष यह खुला पत्र प्रस्तुत करते हैं।
माननीय मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई के नेतृत्व में लागू की गई यह ऐतिहासिक नीति, सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को बनाए रखने और भारत के संविधान में निहित समानता के सिद्धांत को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हम आपसे विनम्रतापूर्वक अनुरोध करते हैं कि संवैधानिक प्रावधानों और सरकारी नीतियों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में रोजगार में पिछड़ा वर्ग (बीसी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए समान सकारात्मक कार्रवाई को लागू करने पर विचार करें।
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