मायावती ने बयान दिया कि लोकसभा में विपक्ष की नेता द्वारा यह स्वीकार करना कि देश की विशाल अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समाज की आबादी के लोगों की राजनीतिक और आर्थिक आशाओं, आकांक्षाओं और आरक्षण तथा उन्हें उनके संवैधानिक अधिकार दिलाने के मामले में कांग्रेस पार्टी सच्ची और विश्वसनीय नहीं रही है। कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह स्वार्थी राजनीति ज़्यादा लगती है जैसे दिल में कुछ और जुबान पर कुछ और।
दरअसल, उनका यह बयान देश के करोड़ों शोषित, वंचित और उपेक्षित अनुसूचित जाति/जनजाति समुदाय के प्रति कांग्रेस पार्टी के उस दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण रवैये से भी उतना ही परिचित कराता है, जिसके कारण इन वर्गों के लोगों को अंततः अपने स्वाभिमान और आत्म-सम्मान तथा अपने पैरों पर खड़े होने की चाहत के चलते अपनी अलग पार्टी बहुजन समाज पार्टी बनानी पड़ी है।
कुल मिलाकर, इसका नतीजा यह है कि कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश समेत देश के प्रमुख राज्यों में लगातार सत्ता से बाहर है और अब सत्ता गंवाने के बाद उसे इन वर्गों की याद आने लगी है, जिसे उनकी नीयत और नीतियों में खोट के कारण घड़ियाली आंसू नहीं तो घड़ियाली आंसू ही कहा जा सकता है, जबकि मौजूदा हालात में भाजपा की एनडीए भी इन वर्गों के प्रति ऐसा ही दोहरा रवैया अपनाती दिख रही है।
उन्होंने आगे कहा कि एससी/एसटी वर्ग को आरक्षण का समुचित लाभ न देना, संविधान निर्माता परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को भारत रत्न की उपाधि से सम्मानित न करना, देश की आजादी के लगभग 40 वर्षों तक ओबीसी वर्ग को आरक्षण की सुविधा न देना, सरकारी नौकरियों में उनके पदों को न भरना और उनका भारी बैकलॉग बनाए रखना आदि जातिवादी रवैये को कौन भूल सकता है, जो आज भी जारी है। इतना ही नहीं, इन सभी जातिवादी दलों ने मिलकर एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण को किसी न किसी बहाने निष्क्रिय और अप्रभावी बना रखा है।
इस प्रकार, दलितों, आदिवासियों और अन्य पिछड़े वर्गों के बहुजन समाज को सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से गुलाम और असहाय बनाए रखने में सभी जातिवादी दल हमेशा एक जैसे रहे हैं। जबकि अम्बेडकरवादी पार्टी बसपा सदैव इन वर्गों की सच्ची हितैषी रही है और यूपी में चार बार बसपा नेतृत्व वाली सरकार में सर्व समाज के गरीबों व शोषितों के साथ-साथ बहुजन समाज के सभी लोगों के जान-माल व धर्म की सुरक्षा व सम्मान के साथ-साथ उनके हितों व कल्याण की पूरी गारंटी रही है। यानी देश के बहुजनों का हित बसपा की लौह गारंटी में निहित है। इसलिए विशेषकर दलितों, आदिवासियों व अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी समाज) को किसी भी विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस, सपा आदि के बहकावे में नहीं आना चाहिए। यही उनकी सुख-शांति व समृद्धि के लिए बेहतर है।