Haryana/J&K Election : एग्जिट पोल कितने सटीक हैं? हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के पिछले नतीजों के अनुमान कितने करीब हैं?

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हरियाणा वि.स. मतदान : हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए शनिवार को मतदान हो रहा है। इससे पहले जम्मू-कश्मीर में मतदान हो चुका है। हरियाणा में मतदान खत्म होते ही सबकी नजर दोनों राज्यों के एग्जिट पोल पर होगी। नतीजे 8 अक्टूबर (मंगलवार) को आने हैं। इससे पहले शनिवार शाम को अलग-अलग एजेंसियों के एग्जिट पोल जारी किए जाएंगे। इन पोल के जरिए यह बताने की कोशिश की जाएगी कि कौन सी पार्टी किस राज्य में सरकार बना सकती है या कितनी सीटें जीत सकती है। एग्जिट पोल के नतीजों की सत्यता को लेकर अक्सर सवाल उठते रहते हैं। हम आपको दोनों चुनावी राज्यों के पिछले नतीजे और एग्जिट पोल के आंकड़े बताने जा रहे हैं। इससे आप समझ पाएंगे कि यह पोल कितना सटीक है? क्या इनमें किए गए दावे सटीक हैं? पिछली बार इन पोल में क्या कहा गया था और बाद में क्या नतीजे आए?

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हरियाणा: 21 सितंबर 2019 को चुनाव आयोग ने हरियाणा में विधानसभा चुनाव की घोषणा की थी। 90 सदस्यीय विधानसभा के लिए 21 अक्टूबर 2019 को वोट डाले गए थे। 24 अक्टूबर 2019 को वोटों की गिनती हुई थी। मतदान के बाद सभी न्यूज़ चैनल और चुनाव सर्वेक्षण एजेंसियों ने एग्जिट पोल के नतीजों में बीजेपी को आसानी से सरकार बनाते हुए दिखाया था। चार बड़े एग्जिट पोल में सत्तारूढ़ बीजेपी को एकतरफा तौर पर 70 से ज़्यादा सीटें जीतते हुए दिखाया गया था। वहीं, एक चैनल ने बीजेपी को 50 से 65 सीटें दी थीं। Haryana Election

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जम्मू कश्मीर: जम्मू-कश्मीर राज्य में आखिरी विधानसभा चुनाव 2014 में हुए थे। तब 87 सीटों वाली विधानसभा के लिए 25 नवंबर से 20 दिसंबर 2014 तक पांच चरणों में मतदान हुआ था। 2014 के एग्जिट पोल में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने का अनुमान लगाया गया था। यह स्पष्ट नहीं था कि जम्मू-कश्मीर में कौन सत्ता में वापसी करेगा। हालांकि, उस समय 87 सीटों वाले जम्मू-कश्मीर में पीडीपी और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर दिखाई गई थी। इन एग्जिट पोल में बताया गया था कि पीडीपी सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है, जबकि बीजेपी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर आ सकती है। वहीं एग्जिट पोल में जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला की अगुवाई वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार को बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। Haryana Election

पिछले चुनाव में एग्जिट पोल में किस पार्टी को कितनी सीटें दी गई थीं?

हरियाणा में न्यूज 18- इप्सोस एग्जिट पोल

बीजेपी – 70 सीटें
कांग्रेस – 10 सीटें
अन्य – 4 सीटें

टाइम्स नाउ एग्जिट पोल

बीजेपी – 71 सीटें
कांग्रेस -11 सीटें
अन्य – 08 सीटें

रिपब्लिक-जन की बात एग्जिट पोल

बीजेपी – 52-63 सीटें
कांग्रेस -15-19 सीटें
अन्य – 7-10 सीटें

एबीपी-सी वोटर एग्जिट पोल

बीजेपी – 72 सीटें
कांग्रेस – 08 सीटें
अन्य – 10 सीटें

जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव 2014 एग्जिट पोल:

सी-वोटर एग्जिट पोल

पीडीपी: 32-38 सीटें
बीजेपी: 27-33 सीटें
नेशनल कॉन्फ्रेंस: 8-14 सीटें
कांग्रेस: ​​4-10 सीटें
अन्य: 2-8 सीटें

एबीपी-नीलसन एग्जिट पोल

पीडीपी: 32-38 सीटें
बीजेपी: 27-33 सीटें
नेशनल कॉन्फ्रेंस: 8-14 सीटें
अन्य: 2-8 सीटें

न्यूज नेशन एग्जिट पोल

पीडीपी: 29-33 सीटें
बीजेपी: 22-26 सीटें
नेशनल कॉन्फ्रेंस: 12-16 सीटें
कांग्रेस: ​​5-9 सीटें
अन्य: 9 सीटें

एग्जिट पोल के बाद कैसे रहे नतीजे?

हरियाणा: जब नतीजे आए तो सभी एग्जिट पोल काफी हद तक गलत साबित हुए। जहां पूर्वानुमानों में सत्तारूढ़ बीजेपी को भारी बहुमत के साथ सरकार बनाते हुए दिखाया गया, वहीं नतीजों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी लेकिन किसी को भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। सत्तारूढ़ बीजेपी बहुमत के आंकड़े से दूर रह गई। 90 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत पाने के लिए 46 सीटों पर जीत जरूरी थी। बीजेपी को सबसे ज्यादा 40 सीटें मिलीं। कांग्रेस 31 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी पार्टी बनी।

विधानसभा चुनाव में जेजेपी 10 सीटें जीतने में सफल रही। सात निर्दलीय, इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) एक और हरियाणा लोकहित पार्टी ने एक सीट जीती थी। चुनाव के बाद पार्टी ने 10 सीटों वाली जेजेपी के साथ गठबंधन किया और राज्य की सत्ता में वापसी की। 27 अक्टूबर 2019 को मनोहर लाल ने हरियाणा के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। किंगमेकर बने दुष्यंत चौटाला ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ने मनोहर लाल की जगह नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री बना दिया। Haryana Election

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जम्मू कश्मीर: राज्य में 2014 के एग्जिट पोल काफी हद तक सही साबित हुए थे। 2014 में जम्मू-कश्मीर राज्य में चुनाव हुए थे। विधानसभा चुनाव के नतीजे 23 दिसंबर 2014 को घोषित किए गए थे। 87 सदस्यीय विधानसभा में महबूबा मुफ्ती की जम्मू-कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) को सबसे ज्यादा 28 सीटें मिलीं। दूसरे नंबर पर भाजपा रही जो 25 सीटें जीतने में सफल रही। फारूक अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 15 सीटें जीतीं जबकि कांग्रेस ने 12 सीटें जीतीं।

निर्दलीयों ने तीन सीटें जीतीं और अन्य छोटी पार्टियों ने चार सीटें जीतीं। नतीजों से साफ था कि कोई भी पार्टी बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई। नतीजों के करीब ढाई महीने बाद पीडीपी के मुफ्ती मोहम्मद सईद ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। पीडीपी को बीजेपी का समर्थन हासिल था जिसके 25 सदस्य थे। इस तरह इस गठबंधन ने बहुमत का आंकड़ा हासिल कर लिया। 7 जनवरी 2016 को सईद की मौत के बाद एक बार फिर राज्य में राजनीतिक अनिश्चितता का दौर आया। राज्य में राज्यपाल शासन लगाना पड़ा। Haryana Election

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