सहारनपुर : जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस शेखर यादव के हालिया विवादित बयान की कड़ी आलोचना की है। महमूद मदनी ने कहा कि उन्होंने अपने पद की विश्वसनीयता को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक सशक्त प्रतिनिधि देश को बांटने वाली ताकतों का सहयोगी बन रहा है। मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि कई ईमानदार जज हैं, जिनके फैसलों से देश का सम्मान बढ़ता है। लेकिन जस्टिस यादव ने अपने बयान से इस पेशे की गरिमा को धूमिल किया है।

आपको बता दें कि जमीयत अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने बुधवार को बयान जारी किया है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि यह बेहद दुखद है कि जिन अदालतों से न्याय और निष्पक्षता के जरिए सभी वर्गों को एकजुट करने की उम्मीद की जाती है। उनका एक सशक्त प्रतिनिधि देश को बांटने वाली ताकतों का हिस्सा बनता जा रहा है।
मौलाना महमूद मदनी ने आगे कहा कि उन्हें संविधान का प्रतिनिधि होना चाहिए, जबकि वह संविधान को नुकसान पहुंचा रहे हैं। न्यायपालिका के सदस्य होने के नाते जस्टिस यादव को इस बात का पूरा अहसास होना चाहिए कि उनके बयान से सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका एक निष्पक्ष संस्था है और संविधान की सर्वोच्चता को बनाए रखना तथा सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना उसका कर्तव्य है।
देश में कई योग्य और ईमानदार न्यायाधीश हैं, जिनके निर्णयों से देश का सम्मान बढ़ता है। लेकिन जस्टिस यादव ने अपने बयान से इस पेशे की गरिमा और इससे जुड़े लोगों के अच्छे नाम को धूमिल किया है। मौलाना मदनी ने मामले की गहन जांच और उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
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