लखनऊ : लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली स्थित साइबर क्राइम थाने ने पिछले हफ़्ते दो बड़े गिरोहों का पर्दाफ़ाश किया जो अन्ना रेड्डी, फेयर प्ले, 99 एक्सचेंज और लोटस बेटिंग ऐप के ज़रिए ठगी करते थे। पुलिस ने राजधानी लखनऊ के गुडंबा और अर्जुनगंज थाना क्षेत्रों से इन गिरोहों के लगभग 50 गुर्गों को गिरफ्तार किया। ये लोग फ़र्ज़ी खातों के ज़रिए सट्टे और निवेश के नाम पर लोगों से ठगी करते थे। पुलिस ने गिरफ़्तार आरोपियों के पास से करोड़ों रुपये, लग्ज़री कारें, कई बैंक खाते और एटीएम बरामद किए हैं।
आरोपियों से बातचीत में इन दोनों गिरोहों के काम करने के तरीके का पता चला है। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात जो सामने आई है, वह यह है कि इन लोगों को सट्टेबाज़ी ऐप्स के ज़रिए रोज़ाना और महीने का टारगेट देकर काम करवाया जा रहा था। डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने बताया कि गिरफ़्तार दोनों साइबर ठगों का पैटर्न लगभग एक जैसा है। ये दोनों अपने शहर के अलग-अलग इलाकों में किराए के मकानों में रह रहे थे। इस फ्लैट में करीब 20 से 25 लड़के रहते थे।
ये मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य चीजों के जरिए लोगों को सट्टा ऐप्स और ऑनलाइन गेम के जरिए फंसाकर करोड़ों रुपये की ठगी करते थे। उन्होंने बताया कि अब तक की पूछताछ में इस गिरोह ने जो सबसे चौंकाने वाली बात बताई है, वह यह है कि उन्हें हर दिन कितनी ठगी करनी होती है। इसका टारगेट दिया जाता था। फिर इस टारगेट को पूरी टीम के लड़कों में बांट दिया जाता था। फिर ये लोग लोगों को ऑनलाइन गेम में फंसाकर ठगी करते थे। डीसीपी क्राइम ने बताया कि इन दोनों गिरोह के सभी सदस्यों को हर दिन करीब एक करोड़ रुपये और हर महीने करीब 25 करोड़ रुपये का टारगेट दिया गया था। जांच में पता चला है कि बिहार के मैरवा सिवान निवासी प्रद्युम्न कुमार सिंह इस गिरोह का संचालन करता था।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने अन्ना रेड्डी, फेयर प्ले, लोटस बेटिंग ऐप और 99 एक्सचेंज के नाम से फर्जी लिंक बनाए थे। टेलीग्राम पर आरोपी ऑनलाइन गेम के नाम पर लिंक शेयर कर उत्तर प्रदेश के अलग-अलग राज्यों के लोगों से संपर्क करते थे। लोग छोटी-छोटी रकम जमा करते थे। जब पीड़ित लालच में आकर और पैसा लगा देते थे, तो गिरोह उन्हें हारवा देता था। इसके बाद सट्टे की रकम किराए के खातों में ट्रांसफर कर एटीएम या ऑनलाइन माध्यम से निकाल लेता था। डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने बताया कि पूछताछ में इन लोगों ने कबूल किया है कि इन आरोपियों का टारगेट पूरा होने के बाद ये मोबाइल और लैपटॉप तोड़ देते थे। फिर नए मोबाइल या लैपटॉप से काम शुरू कर देते थे। इसके लिए यह गिरोह सेकेंड हैंड मोबाइल और लैपटॉप से दोबारा काम शुरू कर देता था। इतना ही नहीं, गिरोह लगातार अपने ठिकाने भी बदलता रहता था।
डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने बताया कि जब दोनों गिरोहों के लैपटॉप और मोबाइल की जाँच की गई, तो पता चला कि इन साइबर ठगों ने गुजरात, छत्तीसगढ़, पुणे, मुंबई के बड़े कारोबारियों को 24 घंटे के अंदर ठगा है। इन जालसाजों ने हवाला के ज़रिए हर महीने करीब 25 करोड़ रुपये मुंबई भेजे हैं। इसके बाद यह रकम दुबई भेजी जाती थी। डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने बताया कि यह सिर्फ एक महीने का रिकॉर्ड है। अभी कई आईपी एड्रेस की जाँच की जा रही है। यह हज़ारों करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी से जुड़ा मामला है। पुलिस अब इनके रिश्तेदारों के बैंक खातों की भी जाँच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हर महीने कितनी रकम कब और कैसे भेजी जाती थी। पुलिस को अब तक लगभग 100 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और इस पैसे को हवाला में खपाने के सबूत मिले हैं। UP Crime News