आपको बता दें कि यह योजना किसानों की फसलों को कीटों और रोगों के प्रकोप, सूखा, बाढ़, तूफान, ओलावृष्टि और असफल बुवाई जैसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय को स्थिर रखना और उन्हें वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है।
बीमा करवाने के लिए किसानों को आधार कार्ड, खतौनी, बैंक पासबुक और फसल विवरण जैसे दस्तावेज़ों की आवश्यकता होती है। किसान बीमा करवाने के लिए बैंक, कॉमन सर्विस सेंटर या ऑनलाइन पोर्टल www.pmfby.gov.in का उपयोग कर सकते हैं। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे नियत तिथि से पहले अपनी फसलों का बीमा करवाकर इस योजना का लाभ उठाएँ। साथ ही, नुकसान होने पर 72 घंटे के भीतर नज़दीकी फसल बीमा केंद्र या हेल्पलाइन नंबर पर सूचित करने की भी सलाह दी गई है, ताकि समय पर बीमा का लाभ मिल सके।
फिरोजाबाद के उप निदेशक कृषि विस्तार सत्येंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, धान की फसल में 1654 रुपये प्रति हेक्टेयर प्रीमियम राशि जमा करके 82,700 रुपये प्रति हेक्टेयर का मुआवजा प्राप्त किया जा सकता है। इसी प्रकार, मक्का की फसल पर 1174 रुपये प्रीमियम देकर 58,700 रुपये प्रति हेक्टेयर, बाजरा की फसल पर 1150 रुपये प्रीमियम देकर 57,500 रुपये प्रति हेक्टेयर, तिल की फसल पर 288 रुपये प्रीमियम देकर 14,400 रुपये मुआवजा पा सकते हैं।
उप निदेशक कृषि विस्तार सत्येंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि किसान को मुआवजा तभी मिलता है जब ग्राम पंचायत स्तर पर बुवाई विफल हो जाती है, प्राकृतिक आपदा से फसल को नुकसान होता है या कटाई के बाद गारंटीशुदा उपज की तुलना में वास्तविक उपज में कमी आती है। इसके अलावा, यदि खड़ी फसल स्थानीय आपदाओं जैसे ओलावृष्टि, जलभराव (धान को छोड़कर), भूस्खलन, बादल फटना, बिजली गिरने से आग लगने आदि से क्षतिग्रस्त होती है, तो भी मुआवजा दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि कटाई के बाद 14 दिनों तक खेत में सुखाने के लिए रखी गई फसल यदि ओलावृष्टि, चक्रवात, बेमौसम बारिश आदि से क्षतिग्रस्त होती है, तो भी मुआवजे का दावा किया जा सकता है। प्राकृतिक आपदा से नुकसान होने पर किसान को 72 घंटे के भीतर टोल फ्री नंबर 14447, बैंक शाखा या फसल बीमा ऐप के माध्यम से फसल बीमा कंपनी को सूचित कर दावा दर्ज कराना होगा।