सहारनपुर : सहारनपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से राज्य सरकार में निहित अर्बन सीलिंग की लगभग 10 करोड़ रुपये की संपत्ति पर निर्माण कार्य करा दिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी सहारनपुर ने उपाध्यक्ष सहारनपुर विकास प्राधिकरण को एक सप्ताह के भीतर पूरे मामले की जांच कर दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और भूमाफियाओं के खिलाफ 6 सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने वर्ष 1993 में तहसील सदर के खाल खां आलमपुरा क्षेत्र में खसरा संख्या 262 61 की 3073 वर्ग मीटर अधिशेष भूमि को अपने कब्जे में ले लिया था, जिसे अधिनियम 1976 के अनुसार 28 जनवरी 2002 को सहारनपुर विकास प्राधिकरण को हस्तांतरित कर दिया गया था, जो वर्तमान में भी प्राधिकरण के नियंत्रण और रखरखाव में शामिल है।
आपको बता दें कि भूमाफियाओं की इस जमीन पर लंबे समय से नजर थी। जिसके चलते कुछ लोगों ने प्राधिकरण से शॉर्टकट लेकर सीलिंग की खाली पड़ी जमीन पर निर्माण शुरू कर दिया। इस दौरान प्राधिकरण के अधिकारियों ने धारा 27 व 28 के तहत नोटिस जारी कर निर्माणकर्ता के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी। जिस पर गुंजन आर्य व देवेंद्र बजाज नामक व्यक्तियों ने प्राधिकरण में सरकारी संपत्ति को अपना बताकर मानचित्र स्वीकृत कराने की योजना को अंजाम देना शुरू कर दिया। जब संबंधित पटेल बाबू ने उक्त खसरा संख्या 26281 में शहरी सीलिंग से मुक्त जमीन के संबंध में कानून व लेखपाल से रिपोर्ट लगाने के लिए प्राधिकरण को फाइल भेजी, तो प्राधिकरण के पाल ने उक्त जमीन के सीलिंग से प्रभावित होने की रिपोर्ट फाइल में लगा दी। लेकिन प्राधिकरण के एक वरिष्ठ अधिकारी ने निर्माण रोकने के बजाय विभागीय स्तर पर निर्माण को जल्दी पूरा कराने में अपनी भूमिका सार्वजनिक कर दी।
इस मामले में तत्कालीन सचिव ने हस्तक्षेप कर 13.6.2025 को निर्माण को सील कर दिया। बताया जाता है कि प्राधिकरण के जोन प्रभारी ने अपर जिला अधिकारी वित्त एवं राजस्व प्रभारी नगरीय सीलिंग को एक पत्र लिखा था, जिसमें पूछा गया था कि खसरा संख्या 2621 की भूमि सीलिंग से प्रभावित है या नहीं, इस पत्र के जवाब में सक्षम प्राधिकारी नगर भूमि सीलिंग रोपण सहारनपुर ने 7 मई 2025 को प्राधिकरण को पत्र भेजकर अवगत कराया कि खसरा संख्या 262 1 की 3073 वर्ग मीटर भूमि नगरीय सीलिंग से मुक्त नहीं है। लेकिन प्राधिकरण के अधिकारियों व कर्मचारियों ने सरकारी भूमि पर कब्जा करने की नीयत से अपर जिलाधिकारी के हस्ताक्षर से फर्जी पत्र तैयार कर उक्त पत्र को प्राधिकरण की फाइल में लगा दिया।
बताया जाता है कि इस पत्र का नंबर व दिनांक तैयार कर फर्जी तरीके से सरकारी भूमि पर कब्जा करने वालों ने प्राधिकरण के अधिकारियों व कर्मचारियों से मिलीभगत कर 586 वर्ग मीटर भूमि को नगरीय सीलिंग से मुक्त दर्शा दिया और उक्त पत्र को फाइल में लगा दिया। जानकारी के मुताबिक़ जब यह पूरा मामला जिलाधिकारी सहारनपुर के संज्ञान में आया तो उन्होंने दिनांक 18.8.2025 को सहारनपुर विकास प्राधिकरण को पत्र लिखकर उपाध्यक्ष को आदेश दिए कि शहरी सीलिंग की भूमि खसरा संख्या 26281 क्षेत्रफल 3073 वर्ग मीटर से अवैध अतिक्रमण हटवाएं तथा सीलिंग की भूमि पर अवैध अतिक्रमण करने व करवाने वाले दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराएं।
सहारनपुर विकास प्राधिकरण को पहले दिन से ही पता था कि उक्त भूमि सीलिंग से प्रभावित है, बावजूद इसके प्राधिकरण के अधिकारी व कर्मचारी सरकारी संपत्ति को अतिक्रमण मुक्त कराने के बजाय अतिक्रमण करवाने में अपनी भूमिका दर्शाते रहे। इस संबंध में सीलिंग लिपिक द्वारा थाना प्रभारी सदर बाजार को मुकदमा दर्ज कराने के लिए प्रार्थना पत्र भी दिया गया, लेकिन थाना सदर बाजार द्वारा मुकदमा दर्ज करने से इंकार कर दिया गया, तब जिलाधिकारी सहारनपुर ने सहारनपुर विकास प्राधिकरण को सीधे जांच कर रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश दिए हैं।
सरकारी जमीन पर कब्जे में पुलिस प्रशासन और प्राधिकरण के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि सरकारी संपत्ति पर कब्जा करने वाले किसी भी अधिकारी, कर्मचारी व भूमाफिया को बख्शा नहीं जाएगा। अब देखना यह है कि प्राधिकरण कब किसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराकर सरकारी संपत्ति पर बने अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने की कार्रवाई करेगा और 3000 वर्ग मीटर जमीन पर कब्जे को पूरा करने के लिए क्या अभियान चलाया जाएगा।
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