सहारनपुर : सहारनपुर के थाना देहात इलाके के पिकी गांव में तीन परिवारों को ईसाई धर्म अपनाना उस समय महंगा पड़ गया, जब एक महिला की मौत हो गई। गांव के दूसरे लोगों ने परिवार को ईसाई बताते हुए शव का अंतिम संस्कार करने से रोक दिया और शव को ईसाई कब्रिस्तान में दफनाने को कहा। इससे गांव में हंगामा हो गया। मामला इतना बढ़ गया कि पुलिस ने पहुंचकर मामला शांत किया, लेकिन महिला का अंतिम संस्कार नहीं होने दिया गया।

इसके बाद गांव में पंचायत हुई और ईसाई धर्म अपनाने वाले परिवार को घर लौटने पर मजबूर किया गया। हिंदू धर्म में वापस आने के बाद महिला के शव का अंतिम संस्कार किया गया। कोतवाली देहात थाना इलाके के गांव पिकी के रहने वाले राम सिंह की पत्नी मामचंदी की बीती रात मौत हो गई। शुक्रवार को जब परिवार वाले शव को जलाने के लिए श्मशान घाट ले जा रहे थे, तो गांव वालों ने मृतक के परिवार को रोक दिया।
गांव वालों का कहना है कि जिन परिवारों ने ईसाई धर्म अपनाया था, उन्हें समुदाय ने पहले ही निकाल दिया था। पिछली रात मामाचंडी की मौत के बाद, समुदाय ने सुबह मंदिर में एक आम सभा की और फैसला किया कि समुदाय का कोई भी व्यक्ति मामाचंडी के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होगा। पंचायत के फैसले के बाद, ईसाई धर्म अपनाने वाले 13 परिवारों में से 11 अपने धर्म में लौटने के लिए मान गए। इसलिए, पंचायत ने फैसला किया कि शव का अंतिम संस्कार गांव के श्मशान घाट में किया जाएगा।
मृतक मामचंदी के बड़े बेटे सुरेंद्र का कहना है कि गांव के अधिकारियों और समुदाय के बीच पंचायत में आपसी सहमति बन गई है। शव का अंतिम संस्कार गांव के श्मशान घाट में किया जाएगा। हालांकि, दो परिवार ऐसे हैं जिन्होंने ईसाई धर्म छोड़ने से इनकार कर दिया है। गांव वालों का कहना है कि उन्हें जल्द ही अपने धर्म में लौटने के लिए मना लिया जाएगा। एसपी सिटी व्योम बिंदल ने बताया कि पिकी गांव में एक महिला के अंतिम संस्कार का मामला सामने आया था। गांव की पंचायत में आपसी सहमति से मामला सुलझा लिया गया है। गांव का माहौल शांत है।

