SBD की चीफ सुपरिटेंडेंट डॉ. सुधा कुमारी ट्रांसफर के बाद भी अपना पद छोड़ने को क्यों नहीं तैयार, कहीं पुराने बिलों को कैश करने की तैयारी तो नहीं ?

Why is SBD's Chief Superintendent Dr. Sudha Kumari not ready to leave her post even after transfer, Superintendent Dr. Sudha Kumaripreparing to cash the old bills?

सहारनपुर : उत्तर प्रदेश में योगी सरकार जहां ज़ीरो-टॉलरेंस पॉलिसी और “गुड गवर्नेंस” का दावा करती है, वहीं हेल्थ डिपार्टमेंट के कुछ सीनियर अधिकारी सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। ताजा मामला सहारनपुर के SBD डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल का है, जहां चीफ सुपरिटेंडेंट डॉ. सुधा कुमारी अपने ट्रांसफर के बाद भी अपना पद छोड़ने को तैयार नहीं हैं। बड़े अधिकारियों ने उनका ट्रांसफर मेरठ मेडिकल कॉलेज कर दिया है। इसके बावजूद, सहारनपुर हॉस्पिटल से उनका लगाव बना हुआ है, जिससे मेडिकल सिस्टम में एक अजीबोगरीब संवैधानिक संकट पैदा हो गया है।

गौरतलब है कि सहारनपुर डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल की चीफ मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. सुधा कुमारी का 4 फरवरी, 2026 को मेरठ मेडिकल कॉलेज में चीफ सुपरिटेंडेंट के पद पर ट्रांसफर हुआ था। हालांकि, नौ दिन बाद भी वह न तो अपना पद छोड़ने को तैयार हैं और न ही मेरठ मेडिकल कॉलेज में अपनी नई पोस्टिंग पर जाने को। यह कहना गलत नहीं होगा कि डॉ. सुधा सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ा रही हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के हेल्थ डिपार्टमेंट ने ऑर्डर नंबर 9224/15-2-2026 जारी किया था। सरकार की स्पेशल सेक्रेटरी आर्यका अखौरी की तरफ से जारी ट्रांसफर ऑर्डर में साफ-साफ लिखा था कि डॉ. सुधा कुमारी (लेवल 5 ऑफिसर) का सहारनपुर से लाला लाजपत राय मेमोरियल (LLRM) मेडिकल कॉलेज, मेरठ में चीफ सुपरिटेंडेंट के पद पर ट्रांसफर किया जाए। ऑर्डर में यह भी लिखा था कि डॉ. कुमारी तुरंत अपनी मौजूदा पोस्टिंग से रिलीव होकर अपनी नई पोस्टिंग पर चार्ज संभाल लें।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, डॉ. सुधा कुमारी को यह ऑर्डर ईमेल और चीफ मेडिकल ऑफिसर (CMO) से मिला। नियमों के मुताबिक, ट्रांसफर ऑर्डर मिलने पर ऑफिसर को तुरंत चार्ज सौंप देना चाहिए। हालांकि, डॉ. कुमारी कई दिनों से अपना पद छोड़ने में आनाकानी कर रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रांसफर के बाद भी डॉ. सुधा कुमारी ने अपने पति (जो रिटायर्ड ऑफिसर भी हैं) के साथ हॉस्पिटल कैंपस का इंस्पेक्शन किया। ट्रांसफर हुए ऑफिसर से चार्ज लिए बिना ऐसा करना एडमिनिस्ट्रेटिव डेकोरम का उल्लंघन माना जा रहा है। हॉस्पिटल के दूसरे सीनियर डॉक्टरों और सूत्रों का कहना है कि जब उनसे चार्ज देने के लिए कहा गया, तो उन्होंने इसे नज़रअंदाज़ कर दिया। उनके मेरठ न पहुंच पाने की वजह से वहां के मेडिकल कॉलेज में चीफ सुपरिटेंडेंट का पद खाली है, जिससे एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम पर असर पड़ रहा है।

इससे यह साफ होता है कि डॉ. सुधा कुमारी सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ा रही हैं। इससे यह सवाल उठता है: क्या डॉ. सुधा कुमारी किसी ताकतवर राजनीतिक हस्ती के संरक्षण में हैं, जिससे वह सरकार के “सख्त” आदेशों को भी नज़रअंदाज़ कर रही हैं? अपने ट्रांसफर के कई दिनों बाद भी, डॉ. सुधा कुमारी ने न तो अपनी नई पोस्टिंग का चार्ज संभाला है और न ही अपनी मौजूदा पोस्ट का चार्ज किसी दूसरे ऑफिसर को सौंपा है। इससे यह भी पता चलता है कि उनके कार्यकाल के दौरान टेंडर भुनाने और बिल भुनाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसा इसलिए है क्योंकि डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में करोड़ों रुपये के फर्जी बिलों का मामला पहले ही सामने आ चुका है, जो अब कोर्ट में पेंडिंग है।

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