इस फैसले से राज्य सरकार पर प्रति वर्ष 105 करोड़ 21 लाख 63 हजार रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। गुरुवार को यूपी विधानसभा में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हुई, जिसके बाद संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने “मंत्री सुविधा विधेयक” का प्रस्ताव रखा। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने पारित कर दिया। अगस्त 2016 के बाद पहली बार यह मानदेय वृद्धि की गई है। विधानसभा समिति ने विधायकों और मंत्रियों के वेतन के साथ-साथ पूर्व विधायकों की पेंशन और भत्ते बढ़ाने के प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी।
इस संशोधन में यात्रा भत्ता, आवास भत्ता और अन्य सुविधाएँ भी शामिल हैं जिससे जनप्रतिनिधियों को बेहतर ढंग से काम करने में मदद मिलेगी। संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने जनप्रतिनिधियों की ज़िम्मेदारियों और बढ़ती महंगाई को देखते हुए इस फैसले को ज़रूरी बताया। उन्होंने कहा कि इस कदम से विधायकों और मंत्रियों को अपनी ज़िम्मेदारियों का बेहतर ढंग से निर्वहन करने में मदद मिलेगी।
खन्ना ने बताया कि विधान परिषद के सदस्य को 6 साल पूरे होने पर 2 हज़ार प्रति माह अतिरिक्त पेंशन दी जाएगी। पहले साल के बाद 2 हज़ार प्रति वर्ष बढ़ते रहेंगे। अगर किसी का कार्यकाल 6 महीने या उससे ज़्यादा है, तो उसे पूरा एक साल माना जाएगा। वहीं पारिवारिक पेंशन जो अब तक 25 हज़ार रुपये थी उसे बढ़ाकर 30 हज़ार कर दिया गया है। पूर्व विधायकों को रेलवे कूपन पहले 1 लाख रुपये प्रति वर्ष मिलते थे। अब इसे एक लाख रुपये की बजाय डेढ़ लाख रुपये कर दिया गया है। इसमें रेल और हवाई यात्रा के लिए 50,000 रुपये और निजी वाहनों के पेट्रोल-डीज़ल के लिए एक लाख रुपये शामिल होंगे। अगर ये बचे रहेंगे, तो इन्हें परिवर्तनीय बनाया जा सकेगा। UP MLA SALARY