राज्य का अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय घोटाला, LUCC चिटफंड घोटाला, अब CBI जाँच की दहलीज़ पर है। उत्तराखंड के सुदूर पहाड़ी गाँवों से लेकर देश के अन्य राज्यों तक, इस सहकारी संस्था ने हज़ारों लोगों की गाढ़ी कमाई लूट ली। जिसके चलते राज्य में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
LUCC धोखाधड़ी मामले में अब तक उत्तराखंड के विभिन्न जिलों देहरादून, पौड़ी गढ़वाल, उत्तरकाशी, टिहरी गढ़वाल और रुद्रप्रयाग में कुल 13 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें पौड़ी ज़िले में 4, टिहरी में 4, देहरादून में 2, रुद्रप्रयाग में 2 और उत्तरकाशी में 1 मामला शामिल है।
LUCC यानी लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी ने दूरस्थ क्षेत्रों में बैंकिंग व्यवस्था की कमज़ोरी का फ़ायदा उठाया। हज़ारों लोगों को लोन और दोगुने रिटर्न का लालच देकर करोड़ों रुपये ठगे गए। शुरुआत में मुनाफ़े का लालच देकर कुछ निवेशकों का विश्वास जीतने वाली इस कंपनी ने बाद में स्थानीय एजेंट नियुक्त किए। इन एजेंटों के ज़रिए बड़े पैमाने पर निवेश करवाया गया। जब रकम करोड़ों में पहुँच गई, तो कंपनी फरार हो गई।
राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में जहाँ 13 मामले दर्ज हैं, वहीं देश के विभिन्न राज्यों में इसके ख़िलाफ़ 70 से ज़्यादा मामले दर्ज हैं। उत्तराखंड सीआईडी इस मामले की जाँच कर रही थी, लेकिन देश के अन्य हिस्सों से लगातार मिल रही शिकायतों के चलते इसे सीबीआई को सौंपने की तैयारी शुरू हो गई है।
LUCC की आड़ में हुआ अमानत का धंधा दरअसल धोखाधड़ी की कहानी थी। सवाल यह है कि ऐसे दूरस्थ क्षेत्रों में और कितनी चिटफंड कंपनियाँ सक्रिय हैं? आखिर कब तक भोली-भाली जनता इनकी ठगी का शिकार होती रहेगी? अब सख्त जाँच की ज़रूरत है ताकि समय रहते ऐसी कंपनियों पर लगाम लगाई जा सके। Uttrakhand News