पहलगाम हमले पर बोले उलेमा, यह हमला नहीं इंसानियत का कत्ल है “दोषियों को मिले ऐसी सज़ा जो नज़ीर बन जाए – Ulema On Pahalgam Attack

Waqf Property Act

सहारनपुर : जम्मू-कश्मीर के सुरम्य इलाक़े पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले ने पूरे मुल्क को झकझोर कर रख दिया। इस दर्दनाक वारदात में 26 मासूम ज़िंदगियाँ बेरहमी से छीन ली गईं। इस अमानवीय और जघन्य हमले की देश के तमाम धर्मगुरुओं ने कड़ी निंदा की है। विशेष तौर पर जमीयत दावातुल मुस्लिमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध देवबंदी उलेमा मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा ने अपने बयान में गहरा दुख और गुस्सा ज़ाहिर किया है।

क़ारी गोरा ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह सिर्फ एक आतंकी हमला नहीं, बल्कि इंसानियत का सरासर क़त्ल है। पूरे मुल्क के उलेमा इस खबर से सदमे में हैं। हम यह समझने में असमर्थ हैं कि ऐसे लोग किस जमीर और सोच से ताल्लुक रखते हैं जो बेगुनाहों की जान लेने से भी नहीं चूकते।” उन्होंने आगे कहा कि इस हमले का दुख शब्दों में बयान करना मुश्किल है और इस अमल की जितनी भी मज़म्मत की जाए, वह कम है।

मौलाना इसहाक़ गोरा ने सरकार से माँग की है कि इस नृशंस अपराध में शामिल दोषियों को फौरन कानून के दायरे में लाकर सख़्त से सख़्त सज़ा दी जाए, ताकि इंसाफ़ हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके।

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे हमले न सिर्फ़ मुल्क की अमन-पसंद तहरीकों को चोट पहुँचाते हैं, बल्कि मज़हब और इंसानियत दोनों को बदनाम करने की साज़िश करते हैं। उन्होंने सभी धर्मों के रहनुमाओं और अवाम से अपील की कि वे मिलकर नफ़रत और ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएँ और मुल्क में मोहब्बत, भाईचारा और इंसाफ़ की फ़ज़ा क़ायम रखें।

यह वक्त है जब पूरी इंसानियत को एकजुट होकर यह पैग़ाम देना चाहिए कि आतंकवाद किसी मज़हब या क़ौम का नहीं होता, बल्कि वह एक वहशियाना सोच है, जिसका हर सूरत में विरोध होना चाहिए।

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